➤अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) को सेवानिवृत्त कर controlled तरीके से पृथ्वी के वायुमंडल में गिराया जाएगा
➤NASA ने ISS को सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने के लिए SpaceX को लगभग 843 मिलियन डॉलर का अनुबंध दिया है
➤ISS के बाद NASA वाणिज्यिक अंतरिक्ष स्टेशनों को बढ़ावा देगा, जिससे अंतरिक्ष में मानव उपस्थिति बनी रहेगी
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS), जो कि लगभग तीन दशकों से पृथ्वी के नजदीक वैज्ञानिक प्रयोगों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का केंद्र रहा है, अब अपनी निर्धारित तकनीकी अवधि के अंत की ओर बढ़ रहा है। इस स्टेशन को 2030-31 के दौरान नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वायुमंडल में वापस लाया जाएगा।
NASA ने इस महत्वपूर्ण मिशन के लिए SpaceX कंपनी को लगभग 843 मिलियन डॉलर का अनुबंध दिया है। इस अनुबंध के तहत SpaceX एक विशेष “US Deorbit Vehicle” विकसित करेगा, जो ISS को सुरक्षित रूप से नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कराएगा। यह प्रक्रिया पृथ्वी के महासागरों के एक निर्जन क्षेत्र में पूरी की जाएगी, जिससे किसी भी प्रकार का खतरा कम से कम होगा।
ISS के बाद NASA वाणिज्यिक अंतरिक्ष स्टेशनों को बढ़ावा देने की योजना बना रहा है। Blue Origin, Axiom Space, और Starlab जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में सक्रिय हैं और नए अंतरिक्ष स्टेशनों का विकास कर रही हैं। Axiom Space ने पहले से ही ISS से जुड़े मॉड्यूल लॉन्च करने शुरू कर दिए हैं, जो भविष्य में स्वतंत्र वाणिज्यिक स्टेशन में परिवर्तित होंगे।
यह परिवर्तन NASA की अंतरिक्ष नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पृथ्वी की निचली कक्षा में वैज्ञानिक अनुसंधान और मानव उपस्थिति बनी रहे। साथ ही, इस कदम से NASA को चंद्रमा और मंगल जैसी नई गहन खोज परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी।
कई विकल्पों पर विचार करने के बाद इसे प्रशांत महासागर के पॉइंट निमो में गिराने का फैसला किया गया है।
पॉइंट निमो क्या है और ISS को क्यों वहां गिराया जाएगा?
पॉइंट निमो दक्षिण प्रशांत महासागर का वह क्षेत्र है जिसे पृथ्वी का सबसे एकांत और निर्जन स्थान माना जाता है। यह जगह न्यूजीलैंड के ईस्ट कोस्ट से लगभग 3000 मील और अंटार्कटिका से करीब 2000 मील दूर है, जहां न तो इंसान जाते हैं और न ही पक्षी इसका रास्ता पकड़ते हैं। वर्षों से, यह स्थान रिटायर हो चुके सैटेलाइट और अंतरिक्ष यानों की कब्रगाह बना हुआ है।
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) का संचालन नासा, रोस्कोस्मोस, यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA), जापानी एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) और कनाडाई स्पेस एजेंसी मिलकर करती हैं। अब इस स्पेस स्टेशन को डिऑर्बिट करने की जिम्मेदारी भी इन्हीं एजेंसियों की है। करीब 150 अरब डॉलर की लागत से बना यह ISS, अब अपने 30 साल के सफर के अंत की ओर बढ़ रहा है। इसे नियंत्रित तरीके से पॉइंट निमो तक ले जाने और सुरक्षित रूप से समाप्त करने के लिए स्पेसएक्स एक विशेष डिऑर्बिट व्हीकल बनाएगा।
ISS को गिराना आखिरी विकल्प क्यों है?
नासा ने ISS को सीधे गिराने के अलावा कई विकल्पों पर विचार किया। इनमें पहला था इसे उच्च कक्षा में धकेल देना ताकि यह ऐतिहासिक अवशेष के रूप में हमेशा के लिए रह सके। हालांकि, वर्तमान कक्षा में अंतरिक्ष मलबे से टकराने का खतरा 50 साल में एक बार है, वहीं उच्च कक्षा में यह खतरा चार साल या उससे भी कम समय में हो सकता है। दूसरा विकल्प था ISS को उसके कक्षा में ही विघटित कर म्यूजियम या रिसर्च केंद्र के रूप में वापस लाना, लेकिन यह असंभव था क्योंकि इसमें भारी फंड और एस्ट्रोनॉट्स के जीवन को जोखिम में डालने वाले फैसले शामिल थे। इसलिए नासा ने निर्णय लिया है कि ISS को नियंत्रित रूप से डिऑर्बिट किया जाएगा और जलने के बाद बचे टुकड़ों को एकत्र कर लिया जाएगा।
क्या ISS के बाद स्पेस स्टेशन नहीं रहेगा?
ISS के बाद भी अंतरिक्ष में रिसर्च का सिलसिला बंद नहीं होगा। नासा निजी कंपनियों के स्पेस स्टेशनों को डिमांड के अनुसार इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। एक्सिओम स्पेस, ब्लू ओरिजिन और वॉयेजर जैसी कंपनियां इस दिशा में काम कर रही हैं। साथ ही, चीन के पास वर्तमान में एक सक्रिय स्पेस स्टेशन ‘तियांगोंग’ है, जबकि रूस 2033 तक अपना स्पेस स्टेशन बनाने की योजना में है। भारत ने भी 2035 तक अपना स्पेस स्टेशन लॉन्च करने का लक्ष्य रखा है।
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ISS का अधिकांश हिस्सा पृथ्वी पर वापस गिराने के दौरान जल जाएगा और जो अवशेष बचेगा, वह पॉइंट निमो की गहराई में स्थायी रूप से दफन हो जाएगा।

