Yamunanagar के 100 करोड़ के बने सिविल अस्पताल का उदाहरण अक्सर सुनने को मिलता है लेकिन सच ये है कि 13 दिन के भीतर बिल्डिंग के उपरी हिस्से की 2 बार टाइलें गिर चुकी हैं। PWD विभाग ने दलील दी कि दूसरी बार टाइलों को हमने गिराया, यमुनानगर सिविल अस्पताल की PMO ने कहा ये खुद गिरी हैं। इस मामले को लेकर शिकायतकर्ता और वकील साहब सिंह गुर्जर ने सीएम विंडो के जरिए सरकार को शिकायत भेजी है।
यमुनानगर का सिविल अस्पताल जिसकी ऊंची-ऊंची बिल्डिंग सरकार की वाहावाही लूटने के लिए काफी हैं। अक्सर हरियाणा के मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल इसका खुले मंच से कई बार गुणगान कर भी चुके हैं। अभी इस अस्पताल की नई बिल्डिंग को बने 1 साल भी नहीं हुआ कि महज 13 दिन के अंदर अलग-अलग बिल्डिंग से 2 बार टाइलें उखड़कर नीचे जा गिरी हैं।
9 मार्च को हुआ था पहला हादसा
पहला हादसा 9 मार्च को हुआ था तब टाइलों से सिविल अस्पताल के स्टाफ की कार पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। लेकिन इसमें जानी नुकसान नहीं हुआ। दूसरा हादसे के बीच 13 दिन का अंतर था यानी 25 मार्च को दूसरी बार भी भारी मात्रा ने टाइलें उखड़कर नीचे गिरी जिसमें दीवार पर लगे सीसीटीवी भी उखडकर नीचे गिर गए। इस मामले को लेकर शिकायकर्ता और वकील साहब सिंह गुर्जर ने सीएम विंडो लगाई है। इस मामले से जुड़े तमाम अधिकारी और बीजेपी के नेताओं को लपेटे में लिया है।
नई बिल्डिंग की 2 बार टाइलें गिर चुकी हैं
यमुनानगर सिविल अस्पताल की PMO ने बताया कि अस्पताल की नई बिल्डिंग की 2 बार टाइलें गिर चुकी हैं। उन्होने कहा कि अस्पताल की नई बिल्डिंग में कई खामिया हैं। सीवरेज लाइन कर बार बंद हो चुकी हैं। गंदा पानी बाहर निकलने से बीमारियां तक फैल जाती हैं। उन्होने कहा कि नई बिल्डिंग में जो बुनियादी सुविधाएं देनी चाहिए थी वो नहीं है लेकिन हमने इस मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी है।
पूरे मामले में लोक निर्माण विभाग निशाने पर है
इस पूरे मामले में लोक निर्माण विभाग निशाने पर है। क्योंकि देखरेख और काम का पूरा जिम्मा इसी विभाग के पास था। मामले को तूल पकडता देख लोक निर्माण विभाग के अधिकारी कुछ अलग ही दलीलें दे रहे हैं। उनका कहना है कि ये टाइलें गर्मी की वजह से गिरी हैं। ऐसे में ये भी कयास लगाए जा सकते हैं कि आने वाले दिनों में तो गर्मी बढ़ेगी और टाइलें और ज्यादा गिरेंगी। उन्होने तो ये तक कह दिया कि अगर हादसा होता है तो इसके लिए ठेकेदार जिम्मेदार है।

