Paris Olympics 2024 : पानीपत के नीरज चोपड़ा ने पेरिस ओलिंपिक में जेवलिन थ्रो इवेंट के फाइनल में जगह बना ली है। उन्होंने क्वालिफिकेशन मैच में पहले थ्रो में 89.34 मीटर दूर जेवलिन फेंक कर फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। फाइनल में पहुंचने के लिए 84 मीटर की दूरी तय करनी थी, लेकिन नीरज ने इससे 5 मीटर ज्यादा थ्रो फेंका। नीरज चोपड़ा का फाइनल मुकाबला 8 अगस्त को होगा।
फाइनल में पहुंचने पर नीरज के पिता सतीश चोपड़ा ने कहा कि बेटा देश की उम्मीदों पर खरा उतरा है। उन्होंने कहा कि सभी को उम्मीद थी कि वह अच्छे से क्वालीफाई करेगा। पूरे देश में खुशी है। मैच से 3-4 दिन पहले नीरज से बात हुई थी और उसने कहा था कि बॉडी अच्छा काम कर रही है। फाइनल में भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है।
नीरज की मां सरोज देवी ने कहा कि इस बार वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चूरमा जरूर खिलाएंगी। पिछली बार भी उन्होंने पीएम को चूरमा भेजा था, लेकिन किसी कारणवश वह नहीं पहुंच पाया था।
नीरज चोपड़ा के बारे में
नीरज चोपड़ा का जन्म 24 दिसंबर 1997 को हरियाणा में पानीपत जिले के खंडरा गांव में हुआ। उन्होंने चंडीगढ़ के दयानंद एंग्लो वैदिक कॉलेज से ग्रेजुएशन की है। बचपन में नीरज को मोटापे को लेकर चिढ़ाया जाता था। जिसके बाद उनके पिता ने उन्हें मतलौडा और बाद में पानीपत के एक जिम में भेजना शुरू किया।
भाला फेंक खिलाड़ी जयवीर चौधरी ने पानीपत खेल प्राधिकरण में आने के दौरान उनकी प्रतिभा को पहचाना। इसके बाद जयवीर, नीरज के पहले कोच बने। उसके बाद नीरज का दाखिला पंचकूला के ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हुआ, जहां उन्हें नसीम अहमद ने ट्रेनिंग दी। उनसे उन्होंने लंबी दौड़ और भाला फेंकना सीखा।
उन्होंने 55 मीटर की थ्रो रेंज हासिल की, लेकिन जब वे लखनऊ की 2012 की जूनियर चैंपियनशिप में हिस्सा लेने गए, तो उन्होंने 68.40 मीटर का रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद नीरज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
दक्षिण एशियाई खेलों में नीरज के प्रदर्शन से प्रभावित होकर भारतीय सेना ने उन्हें राजपूताना राइफल्स में जूनियर कमीशंड ऑफिसर के पद का ऑफर दिया। उन्हें नायब सूबेदार का पद दिया गया, जो एथलीटों के लिए आसानी से उपलब्ध होने वाला पद नहीं है। उन्हें 2016 में औपचारिक रूप से जेसीओ के रूप में शामिल किया गया और ट्रेनिंग के लिए छुट्टी दी गई।







