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मोहन भागवत की गिरफ्तारी का दबाव था, पूर्व एटीएस अधिकारी का सनसनीखेज आरोप

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➤पूर्व एटीएस अधिकारी मेहबूब मुझावर ने मालेगांव ब्लास्ट जांच में बड़ा दावा किया
➤कहा, मुझ पर RSS प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने का दबाव बनाया गया था
➤आदेश नहीं मानने पर उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ और 40 साल का करियर खत्म कर दिया गया

पूर्व एटीएस अधिकारी मेहबूब मुझावर ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा है कि 2006 के मालेगांव ब्लास्ट की जांच के दौरान उन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने का दबाव बनाया गया था। उनका कहना है कि यह दबाव पूरी तरह से राजनीतिक था और इसका उद्देश्य जांच को एक खास दिशा में मोड़ना था।

मुझावर ने आरोप लगाया कि उन्होंने इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया, क्योंकि उनके अनुसार जांच में भागवत के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं था। इस फैसले के बाद, उनके खिलाफ साजिश रचते हुए झूठा मामला दर्ज कर दिया गया और उनके 40 वर्षों के ईमानदार पुलिस करियर को अचानक समाप्त कर दिया गया।

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उन्होंने कहा, “मैंने सत्य और कानून के अनुसार काम किया, लेकिन राजनीतिक ताकतों ने मेरी ईमानदारी की सजा दी। मेरे खिलाफ ऐसा माहौल बना दिया गया कि मैं अपने ही विभाग में संदिग्ध बन गया।”

मेहबूब मुझावर का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब देश में जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। मुझावर का कहना है कि उन्होंने कभी किसी के दबाव में आकर काम नहीं किया और यही बात उनकी बर्बादी का कारण बन गई।

उन्होंने यह भी कहा कि मालेगांव ब्लास्ट की जांच को एक खास दिशा देने की कोशिशें उस वक्त ही शुरू हो गई थीं, और उन अधिकारियों को साइडलाइन किया गया जो उस प्रवाह के खिलाफ खड़े हुए।

अब इस मामले के सामने आने से राजनीतिक हलकों में भी हलचल मच गई है। इस दावे की सत्यता की पुष्टि तो अभी नहीं हुई है, लेकिन इससे एक बार फिर जांच एजेंसियों के राजनीतिक इस्तेमाल पर बहस छिड़ गई है।