➤सुप्रीम कोर्ट ने पहलवान सुशील कुमार की जमानत रद्द की
➤एक सप्ताह में आत्मसमर्पण का आदेश
➤मामला सागर धनखड़ हत्या से जुड़ा
भारत के सबसे सफल पहलवानों में शुमार और दो बार के ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने बुधवार को चत्रसाल स्टेडियम हत्या मामले में उनकी जमानत रद्द करते हुए एक हफ्ते के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि इतने गंभीर अपराध के मामले में सुशील को मिली राहत बरकरार नहीं रखी जा सकती।
कुश्ती करियर की सुनहरी शुरुआत
सुशील कुमार का जन्म 26 मई 1983 को हरियाणा के नाहरी गांव, जिला सोनीपत में हुआ। वे बेहद साधारण परिवार से आते हैं, उनके पिता डींगुराम दिल्ली में ड्राइवर थे और मां कमल देवी गृहिणी। सुशील ने बचपन से ही कुश्ती में रुचि दिखाई और 14 साल की उम्र में प्रशिक्षण लेना शुरू किया। शुरुआती दौर में वे चत्रसाल स्टेडियम, दिल्ली और नाना चंदगीराम अखाड़ा में अभ्यास करते थे।
2003 में उन्होंने कॉमनवेल्थ कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अपना नाम बनाया। इसके बाद 2008 बीजिंग ओलंपिक में 66 किग्रा फ्रीस्टाइल में कांस्य पदक और 2012 लंदन ओलंपिक में रजत पदक जीतकर वे भारत के सबसे चर्चित एथलीटों में शामिल हो गए। सुशील ने वर्ल्ड चैंपियनशिप 2010 में भी स्वर्ण पदक जीता और कई एशियन व कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल हासिल किए।
विवादों में फंसा करियर
सुनहरे करियर के बीच सुशील विवादों में भी घिरते रहे। 2016 रियो ओलंपिक में चयन को लेकर विवाद हुआ, जब उन्होंने ट्रायल की मांग की लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद उनका सक्रिय खेल करियर लगभग खत्म हो गया और वे कोचिंग व स्टेडियम मैनेजमेंट से जुड़ गए।
चत्रसाल स्टेडियम हत्या मामला
मई 2021 में दिल्ली के चत्रसाल स्टेडियम में पहलवानों के दो गुटों में झगड़ा हुआ, जिसमें 23 वर्षीय पहलवान सागर धनखड़ की मौत हो गई। पुलिस जांच में सुशील कुमार पर आरोप लगा कि उन्होंने विवाद के दौरान सागर को बुरी तरह पीटा और घटनास्थल पर मौजूद थे। FIR में हत्या, अपहरण और आपराधिक साजिश की धाराएं लगाई गईं।
कई दिनों तक फरार रहने के बाद मई 2021 में दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। निचली अदालत से लेकर हाईकोर्ट तक उनकी जमानत याचिकाएं खारिज हुईं, लेकिन 2022 में उन्हें एक उच्च अदालत से जमानत मिल गई। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस जमानत को रद्द करते हुए उन्हें आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है।
गौरव से गुनाह तक
सुशील कुमार का सफर भारतीय खेल इतिहास में एक मिसाल के रूप में शुरू हुआ था—एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर विश्व पटल पर नाम रोशन करना। लेकिन हत्या के आरोप ने उनकी छवि को गंभीर रूप से प्रभावित किया। अदालत का यह ताजा फैसला उनके जीवन के सबसे कठिन मोड़ों में से एक है, जहां उन्हें कानून के सामने जवाब देना होगा।

