➤ उपराष्ट्रपति चुनाव में आचार्य देवव्रत का नाम चर्चा में
➤ जाट बिरादरी से आने के कारण राजनीतिक महत्व बढ़ा
➤ NDA जल्द कर सकता है उम्मीदवार की घोषणा
देश में उपराष्ट्रपति पद की कुर्सी पर जाट नेता बैठ सकता है। सूत्रों के अनुसार इस अनुभवी नेता का नाम फाइनल हो चुका है। इसमें गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और ओम प्रकाश धनखड़ का नाम चर्चा में है। बता दें कि जगदीप धनखड़ के इस्तीफ़े के बाद यह पद खाली हुआ है और NDA की ओर से उम्मीदवार चुनने की कवायद तेज हो गई है। आचार्य देवव्रत न केवल अपनी जाट पृष्ठभूमि के कारण राजनीतिक संतुलन बना सकते हैं, बल्कि उनकी शिक्षक और आध्यात्मिक छवि भी उन्हें खास बनाती है।
आचार्य देवव्रत का जीवन आर्य समाज से जुड़ा रहा है। वे कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल में प्रधान के रूप में कार्य कर चुके हैं और पहले हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल भी रह चुके हैं। राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि जाट समाज को साधने के लिए बीजेपी और NDA उन्हें उम्मीदवार बना सकते हैं। उनकी छवि साफ-सुथरी और गैर-विवादित मानी जाती है, जिससे उनकी स्वीकार्यता कई दलों में संभव है।
वहीं ओम प्रकाश धनखड़ जिन्हें ओपी धनखड़ के नाम से भी जाना जाता है (जन्म 1 अगस्त 1961), एक भारतीय राजनीतिज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से संबंधित हैं और पूर्व में भारतीय जनता पार्टी, हरियाणा के अध्यक्ष हैं। वे 2019 तक हरियाणा की भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री थे।
सूत्रों के मुताबिक, NDA में उनके अलावा दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के नाम भी चर्चा में हैं। चुनाव प्रक्रिया के तहत नामांकन 21 अगस्त तक होंगे, 22 अगस्त को जांच और 25 अगस्त नाम वापसी की आखिरी तारीख है। मतदान 9 सितंबर को होगा। NDA ने उम्मीदवार चुनने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को सौंपी है। संभव है कि 18 से 20 अगस्त के बीच उम्मीदवार का नाम घोषित कर दिया जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आचार्य देवव्रत का नाम आने से उपराष्ट्रपति पद का चुनाव और दिलचस्प हो गया है, खासकर उत्तर भारत की जातीय और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए।

