➤ सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा में 2 साल 10 माह पुराने सरपंच चुनाव परिणाम बदले
➤ 51 वोटों से हारे प्रत्याशी को दोबारा गिनती में विजयी घोषित किया गया
➤ देश में पहली बार सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में ईवीएम पुनर्गणना हुई
हरियाणा के पानीपत जिले के बुआना लाखु गांव के सरपंच चुनाव का परिणाम सुप्रीम कोर्ट ने बदल दिया है। यह फैसला दो वर्ष 10 माह पुराने चुनाव को लेकर आया, जिसमें अब तक विजेता रहे प्रत्याशी कुलदीप की जगह, दोबारा गिनती के बाद मोहित को विजयी घोषित किया गया है।
यह मामला देश का पहला उदाहरण है, जब सर्वोच्च न्यायालय ने अपनी निगरानी में ईवीएम (Electronic Voting Machine) की पुनर्गणना करवाई और उसी आधार पर आदेश सुनाया। सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ — न्यायमूर्ति सूर्यकांत, दीपांकर दत्ता और एनके सिंह ने इस ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि ओएसडी (रजिस्ट्रार) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है, विशेषकर जब पूरी पुनर्गणना की वीडियोग्राफी की गई हो। गुरुवार को पानीपत के इसराना बीडीओ कार्यालय में मोहित को बुआना लाखु के नए सरपंच पद की शपथ दिलाई जाएगी।
2 नवंबर 2022 को हुए ग्राम पंचायत चुनाव में, एक अधिकारी की गलती से कुछ घंटे के लिए गांव में दो सरपंच घोषित कर दिए गए थे। शुरुआती गणना में कुलदीप को विजयी घोषित कर प्रमाणपत्र दे दिया गया, लेकिन बाद में पुनर्गणना में मोहित विजेता पाए गए।
गांव में 7 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे, लेकिन मुकाबला मुख्य रूप से कुलदीप और मोहित के बीच था। बूथ नंबर 69 पर गिनती के दौरान बड़ी गलती हुई — मोहित के वोट कुलदीप के खाते में जोड़ दिए गए और कुलदीप के वोट मोहित के खाते में। इस त्रुटि के कारण गलत परिणाम घोषित हो गया।
कानूनी लड़ाई
- गलती उजागर होने पर रिटर्निंग अधिकारी ने मोहित को विजेता घोषित किया, लेकिन कुलदीप ने हार मानने से इनकार कर दिया और 12 नवंबर 2022 को हाई कोर्ट से स्टे ले आया।
- 1 जून 2025 को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने दोबारा गिनती कराने से इनकार कर दिया और फैसला कुलदीप के पक्ष में दिया।
- मोहित ने 12 जून 2025 को सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
31 जुलाई को सुनवाई के बाद, 7 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने अपनी निगरानी में दोबारा गिनती का आदेश दिया। गिनती के नतीजे में कुलदीप को 1000 वोट और मोहित को 1051 वोट मिले।
11 अगस्त को फैसला सुनाते हुए अदालत ने मोहित को विजयी घोषित किया और जिला प्रशासन को दो दिन के भीतर शपथ दिलाने का निर्देश दिया।

