➤ यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा के पिता ने PM मोदी को लिखी चिट्ठी, पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल
➤ पिता का आरोप: पुलिस ने कोरे कागजों पर साइन करा खुद स्टेटमेंट लिखी, FIR रद्द करने की मांग
➤ ज्योति के पिता ने गारंटी दी कि बेटी कभी पाकिस्तान नहीं जाएगी
पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार की गई हिसार की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा के पिता हरीश मल्होत्रा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समेत कई बड़े नेताओं को एक चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में उन्होंने हिसार पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
ज्योति के पिता ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनकी बेटी से कोरे कागजों पर साइन कराकर खुद ही अपनी मर्जी से स्टेटमेंट लिखी है। उन्होंने कहा कि पुलिस 9 दिन के रिमांड के दौरान देशद्रोह की धारा से संबंधित एक भी सबूत नहीं जुटा पाई है। पिता ने हिसार SP के बयान का भी हवाला देते हुए FIR को रद्द करने की मांग की है। इसके साथ ही, उन्होंने एक भावनात्मक अपील करते हुए यह भी कहा है कि उनकी बेटी अब कभी भी पाकिस्तान नहीं जाएगी और वह इसकी गारंटी लेते हैं।

हिसार पुलिस ने ज्योति मल्होत्रा को 16 मई को गिरफ्तार किया था। उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 की धारा 3, 4 और 5 के तहत जासूसी, राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने और गोपनीय जानकारी साझा करने जैसे गंभीर आरोप हैं। आज सोमवार को ज्योति की कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए छठी पेशी हुई, जिसमें कोर्ट ने उनकी न्यायिक हिरासत 14 दिन और बढ़ा दी है।

पिता ने FIR पर तीन प्रमुख सवाल उठाए:
- पुलिस ने कोरे कागजों पर साइन कराकर स्टेटमेंट खुद लिखी: हरीश ने कहा कि उनकी बेटी से कई कोरे कागजों पर साइन करवाकर पुलिस ने मनमुताबिक स्टेटमेंट लिखी, जबकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20 के तहत पुलिस किसी को भी खुद के खिलाफ गवाह नहीं बना सकती।
- देशद्रोह की धारा हटाने की मांग: उन्होंने कहा कि FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 जोड़ी गई है, लेकिन 9 दिन के रिमांड के दौरान भी पुलिस इस धारा के तहत कोई सबूत नहीं जुटा पाई, इसलिए यह धारा हटाई जानी चाहिए।
- हिसार SP के बयान का हवाला: उन्होंने हिसार SP के लिखित प्रेस नोट का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जांच के दौरान ज्योति की किसी भी संवेदनशील, सैन्य या रणनीतिक जानकारी तक पहुंच नहीं मिली है, इसलिए ऑफिशियल सिक्रेट एक्ट की धाराएं भी उचित नहीं हैं।

