पानीपत में भाजपा के जिला परिषद चेयरपर्सन ने अविश्वास प्रस्ताव देखकर अपना इस्तीफा दे दिया है। ज्योति शर्मा ने मीटिंग में भाग लिया, लेकिन कम वोटों की वजह से उन्होंने इस्तीफा दे दिया। ज्योति शर्मा ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से बात की थी और उनकी सलाह पर इस्तीफा दिया। उन्हें कोई नई जिम्मेदारी दी जाएगी।
बता दें कि इस्तीफे के पीछे की कहानी यह है कि पहले 25 जनवरी को 12 पार्षदों ने चेयरपर्सन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग की थी। बाद में इस मुद्दे को हाईकोर्ट में ले जाया गया। जिसके बाद डीसी ने 6 मार्च को बैठक तय की। अविश्वास प्रस्ताव के पीछे का मुख्य कारण यह था कि 12 पार्षद चेयरपर्सन के खिलाफ थे। इससे उनकी सीट का बहुमत खत्म हो गया और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
ज्योति ने इस्तीफा देते हुए कहा कि चेयरपर्सन की सीट पर दलाली हो रही थी और उन्हें इससे छुटकारा चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में हार-जीत के चक्कर में यह सब होता रहता है। अब उन्हें इस सीट को अपने लिए उचित नहीं समझा।

कुर्सी बचाने के लिए चाहिए थे 17 में से 6 वोट
पहले पार्षदों ने चेयरपर्सन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया। डीसी ने मीटिंग की तारीख तय की, लेकिन बाद में इसे टाल दिया गया। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। चेयरपर्सन के खिलाफ 12 पार्षद थे और जब चेयरपर्सन का वाइस चेयरमैन कांग्रेस में चला गया, तो उनके विरोध में 13 वोट हो गए।

चेयरपर्सन को अपनी कुर्सी बचाने के लिए 17 में से 6 वोट चाहिए थे, लेकिन इसे पूरा नहीं किया गया। इस वजह से उन्होंने इस्तीफा दे दिया। ज्योति शर्मा ने इससे जुड़ी अपनी राय दी, यह सीट कीचड़बाजी का खेल है, मुझे छुटकारा चाहिए था। मैं अब इस सीट को अपने लिए उपयुक्त नहीं समझती।
