सूरत के कारोबारी महेंद्र शर्मा ने पक्षी प्रेम की अनूठी मिसाल पेश की है। इसकी शुरूआत उन्होंने चरखी दादरी जिले में आने वाले अपने पैतृक गांव माई खुर्द से की है। महेंद्र शर्मा ने अपने निजी खर्च पर पक्षियों के लिए 7 मंजिला टावर बनवाया है, जिसकी ऊंचाई 70 फुट के करीब है।
एक टावर की खास बात है कि समय में करीब चार हजार पक्षी रूक सकेंगे। हाल ही में टावर बनकर तैयार हुआ है और इसका खर्चा करीब 12 लाख रुपये आया है। महेंद्र शर्मा करीब 30 साल पहले सूरत शिफ्ट हुए थे। उनका वहां हार्डवेयर का कारोबार है। महेंद्र शर्मा ने बताया कि पेड़ों की संख्या कम होने से पक्षी खत्म हो रहे हैं। पक्षियों को बचाने के लिए ऐसे टावर बनवाने चाहिए।
गुजरात से 20 कारीगरों की टीम ने बनाया टावर
महेंद्र ने बताया कि करीब चार महीने पहले गुजरात से 20 कारीगरों की टीम टावर बनाने के लिए माई खुर्द गांव में भेजी गई। इस टीम ने चार महीने के अंदर-अंदर 100 फुट का टावर बनाकर तैयार कर दिया। उन्होंने बताया कि ये टावर 30 फुट जमीन के नीचे और 70 फुट जमीन के ऊपर हैं। इस टावर में जो सामग्री प्रयोग हुई है उसकी अपनी खासियत हैं। हाल ही में पक्षियों के लिए माई खुर्द में बनकर तैयार हुआ टावर चर्चा का विषय बना है।
7 टावर और बनवाने की योजना
महेंद्र शर्मा के अनुसार पक्षियों के संरक्षण के लिए प्रकृति सुरक्षा संघ नाम से संस्था बनाई है जो कि है। ये संस्था सात और गांवों में ऐसे टावर बनवाएगी। इनमें से तीन जगहों का नाम आ चुका है जो कि बीजणा, भिवानी का कुंडल-बास व खोरड़ा शामिल है। इसके अलावा चार और टावर बनवाने के लिए ग्राम पंचायतों को मिलाकर धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं से बातचीत की जा रही है।
क्या है टावर की खासियत
महेंद्र शर्मा ने जो सात मंजिला टावर बनवाया है उसकी अपनी खासियत हैं। मनवाने की सामग्री और दूसरा सामान गुजरात से मंगवाया गया है। ये टावर भूकंप रोधी है। यह गर्मियों में ठंडा और सर्दियों में गर्म रहेगा। पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था के लिए टावर के निचले हिस्से में कुंड बनाया गया है जो जमीनी पानी से भर जाएगा।

