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हरियाणा के ये चार सरपंच जिन्हे स्वतंत्रता दिवस पर प्रधान मंत्री ने किया सम्मानित

हरियाणा

➤हरियाणा के 4 सरपंच स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित
➤स्वच्छता, जल संरक्षण, हरियाली और विकास में विशेष योगदान
➤गांवों में आधुनिक सुविधाएं, पर्यावरण और खेल को बढ़ावा

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देशभर की 2.62 लाख पंचायतों में से चुने गए 100 सरपंचों में हरियाणा के चार सरपंच भी शामिल होंगे। ये पंचायतें स्वच्छता, हरियाली, जल प्रबंधन और गांव में उल्लेखनीय सुविधाओं के लिए सम्मानित की जा रही हैं। दिल्ली बुलाए गए इन सरपंचों का सम्मान अलग-अलग दिन होगा, लेकिन संभावना है कि हरियाणा के सरपंचों को 16 अगस्त को सम्मानित किया जाएगा।

चुने गए सरपंचों में करनाल के गांव सुल्तानपुर के जसमेर सिंह, महेंद्रगढ़ जिले के नीरपुर राजपूतान के रतन पाल सिंह, फरीदाबाद के बहादुरपुर के रविंद्र सिंह बांकुरा और भिवानी जिले के शेरपुरा गांव की सुमित्रा देवी शामिल हैं। 15 अगस्त को इन्हें सुबह 6 बजे लाल किले पर बुलाया गया है, जबकि कार्यक्रम का अंतिम दिन 17 अगस्त तक रखा गया है।

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सुल्तानपुर (करनाल) – श्रमदान की परंपरा और स्वच्छता में नंबर-1

1,800 की आबादी वाला करनाल का गांव सुल्तानपुर 2023 स्वच्छता सर्वेक्षण में हरियाणा में नंबर-1 रहा। यहां स्वच्छता की परंपरा पुरानी है—लोग सफाई कर्मियों का इंतजार नहीं करते, बल्कि अपने घर और गलियां खुद साफ करते हैं। सरपंच जसमेर सिंह बताते हैं कि गांव में श्रमदान की शुरुआत 1972 में हुई, जब मुख्यमंत्री बंसी लाल ने स्कूल बनाने की चुनौती दी और ग्रामीणों ने जमीन व श्रम देकर स्कूल खड़ा कर दिया। बाद में मिडिल स्कूल भी श्रमदान से बना।

गांव में 40 लाख रुपये से बने फाइव पोंड का पानी खेती में इस्तेमाल हो रहा है, आसपास फूल-पौधों से सुंदरता बढ़ाई गई है। 1983 में बने ग्राम सचिवालय का जीर्णोद्धार कर उसमें सरपंच कार्यालय, सीएससी सेंटर, बिजली निगम कार्यालय और ई-लाइब्रेरी बनाई गई है। पंचायत के पास 73 एकड़ जमीन से हर साल 41 लाख रुपये की आय होती है, जिसे विकास में लगाया जाता है।

गांव में सरपंच अक्सर सर्वसम्मति से चुने जाते हैं और यहां कभी चुनावी विवाद नहीं हुआ। करीब 300 युवा विदेश में हैं, जबकि सरकार सुल्तानपुर को 22 पंचायत लर्निंग सेंटरों में शामिल कर आधुनिक डिजिटल सुविधाएं देने जा रही है। सरपंच जसमेर चाहते हैं कि पर्याप्त फंड मिलने पर सुल्तानपुर को पर्यटन गांव के रूप में विकसित किया जाए।


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शेरपुरा (भिवानी) – कचरे से खाद और ओपन जिम-पार्क से पहचान

भिवानी का शेरपुरा गांव 2,500 की आबादी वाला है और यहां सरपंच सुमित्रा पिलानिया के नेतृत्व में स्वच्छता अभियान जन आंदोलन के रूप में चला। घर-घर डस्टबिन रखवाए गए, लोग कचरा सड़कों पर न डालकर खेतों में खाद के रूप में इस्तेमाल करते हैं। गलियां पक्की की गईं, श्मशान घाट का रास्ता सुधारा गया, पेड़-पौधे लगाकर हरियाली बढ़ाई गई और गांव को जलभराव व कचरा मुक्त किया गया।

गांव में डेढ़ एकड़ का पार्क और ओपन जिम बनाए गए, जो ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य और मनोरंजन का केंद्र हैं। स्वच्छता जागरूकता के लिए रैलियां और प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित हुए। करीब दो महीने पहले आई टीम ने निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की, जिसके बाद राष्ट्रीय सम्मान की घोषणा हुई।


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नीरपुर राजपूतान (महेंद्रगढ़) – खेलों से नशा मुक्ति की पहल

1,200 की आबादी वाला नीरपुर राजपूतान गांव नशा मुक्त हरियाणा अभियान के तहत नशा मुक्त घोषित किया जा चुका है। सरपंच रतनपाल सिंह चौहान ने युवाओं को खेलों की ओर प्रेरित करने के लिए 4 एकड़ में डे-नाइट क्रिकेट स्टेडियम बनवाया, जिसे सम्राट पृथ्वीराज चौहान के नाम से जाना जाता है। इसमें टावर लाइट और विशेष घास लगी है, जहां दिन-रात मैच होते हैं।

जल संरक्षण के लिए गांव में बरसाती और गंदे पानी के लिए अलग-अलग तालाब बनाए गए। सीएसआर के तहत करीब एक करोड़ रुपये का फंड मिला और कुल डेढ़ करोड़ रुपये जल संरक्षण व स्वच्छता पर खर्च किए गए। यहां खेलों का माहौल युवाओं को सकारात्मक दिशा दे रहा है।


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बहादुरपुर (फरीदाबाद) – सौर पंप से 80 एकड़ सिंचाई

3,000 की आबादी वाला बहादुरपुर गांव जल संरक्षण और स्वच्छता के कार्यों के लिए चुना गया है। सरपंच रविंद्र सिंह बांकुरा ने गांव के दो जोहड़ों के पानी को सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपों के जरिए खेतों तक पहुंचाया, जिससे 80 एकड़ फसल की सिंचाई होती है और भू-जल संरक्षण होता है। इसके लिए पाइपलाइन बिछाई गई और हर 5 एकड़ पर पानी निकासी की व्यवस्था की गई।

गांव में दो एकड़ का पार्क और चारों ओर पक्का वॉकिंग ट्रैक बनाया गया है। घर-घर से कचरा उठाने के लिए दो सफाई कर्मचारी नियुक्त हैं। दिलचस्प है कि 15 अगस्त को सरपंच का जन्मदिन भी है, जिससे यह सम्मान उनके लिए विशेष बन गया है।


राष्ट्रीय पहचान की ओर बढ़ते हरियाणा के गांव

इन चारों गांवों के सरपंचों ने अपने नेतृत्व में विकास, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक बदलाव का ऐसा मॉडल पेश किया है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। प्रधानमंत्री द्वारा मिलने वाला यह सम्मान न केवल इन पंचायतों की उपलब्धियों का प्रतीक होगा, बल्कि अन्य गांवों को भी प्रेरित करेगा कि वे अपनी सोच और कार्यशैली में बदलाव लाकर नई ऊंचाइयों को छुएं।