पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से फरीदाबाद के कर्मचारियों की मांगों को ध्यान में लेने को कहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि समाज के एक वर्ग के साथ हो रही पीड़ा और उत्पीड़न को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने सरकार की ‘सुस्त और संवेदनहीन’ दृष्टिकोण की भी आलोचना की। जस्टिस संदीप मौदगिल की बैंच ने राम रतन और अन्यों द्वारा दायर याचिकाओं का निर्देश जारी किया। याचिका में फरीदाबाद नगर निगम के कई पदों पर काम करने वाले लोगों ने 2019 में जारी किए गए आदेश को रद्द करने की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था क्योंकि उन्होंने नियमितीकरण के लिए आवश्यक योग्यताएं पूरी नहीं की थी, जैसा कि 2003 की पॉलिसी में बताया गया था। लेकिन कोर्ट ने उनकी सेवाओं की महत्ता को समझा और उन्हें न्यायिक संरक्षण दिया। कोर्ट ने सरकार की सुस्त रवैये की भी आलोचना की और कहा कि यह सामाजिक न्याय के खिलाफ है। उन्होंने आदेश जारी किया कि कर्मचारियों को मुआवजा देना चाहिए।

