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SYL पर पंजाब से बात करने को तैयार हरियाणा, CM मनोहर लाल ने लिखी चिट्ठी, मुद्दे पर मुलाकात जरूरी

पंचकुला बड़ी ख़बर हरियाणा

सतलुज-यमुना लिंक नहर ( एसवाईएल) पर हरियाणा लगातार अपना हक जता रहा है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी हर संभव कदम उठा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की पैरवी करने के बाद अब हरियाणा सीएम ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को चिट्‌ठी लिखी है।

बता दें कि सीएम मनोहर लाल खट्टर ने चिट्‌ठी में स्पष्ट किया कि वे एसवाईएल नहर के निर्माण के रास्ते में आने वाली किसी भी बाधा या मुद्दे को हल करने के लिए उनसे मिलने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि एसवाईएल को लेकर 4 अक्टूबर को एससी ने एक विस्तृत आदेश पारित किया है। जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि निष्पादन जल के आवंटन से संबंधित नहीं है। मनोहर लाल ने कहा कि हरियाणा का प्रत्येक नागरिक 1996 के मूल वाद संख्या 6 के डिक्री के अनुसार पंजाब के हिस्से में एसवाईएल नहर के निर्माण के शीघ्र पूरा होने की उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहा है। इसके अलावा वे अपने लोगों और दक्षिणी हरियाणा में हमारी सूखी भूमि के इस लंबे समय से प्रतीक्षित सपने को साकार करने के लिए कुछ भी करने को हमेशा तैयार हैं। उन्होंने उम्मीद जताई की पंजाब सरकार निश्चित रूप से इस मामले को हल करने में अपना सहयोग देगी।

पंजाब सरकार के नकारात्मक रवैये के कारण बैठकें रही थी बेनतीजा

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दरअसल पंजाब के मुख्यमंत्री ने 4 अक्टूबर के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से एक दिन पहले यानी 3 अक्टूबर को मुख्यमंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखा था और इस मुद्दे को लेकर द्विपक्षीय बैठक करने के लिए समय मांगा था। जिससे पहले दोनों के बीच आखिरी बार 14 अक्टूबर 2022 को द्विपक्षीय बैठक हुई थी। इसके बाद केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने 4 जनवरी 2023 को दूसरे दौर की चर्चा की। जिसमें दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद थे। गौर करने वाली बात है कि एसवाईएल नहर पर हुई सभी बैठकें पंजाब सरकार के नकारात्मक रवैये के कारण बेनतीजा रही थीं।

क्रियान्वयन में रोड़ा अटकाने का किया प्रयास
सर्वोच्च न्यायालय के दो फैसलों के बावजूद पंजाब ने एसवाईएल का निर्माण कार्य पूरा नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को लागू करने की बजाए पंजाब ने वर्ष 2004 में समझौते निरस्तीकरण अधिनियम बनाकर इनके क्रियान्वयन में रोड़ा अटकाने का प्रयास किया। पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के प्रावधान के अंतर्गत भारत सरकार के आदेश 24 मार्च 1976 के अनुसार हरियाणा को रावी-ब्यास के फालतू पानी में से 3.5 एमएएफ जल का आबंटन किया गया था।

1.62 एमएएफ पानी इस्तेमाल कर रहा हरियाणा

एसवाईएल कैनाल का निर्माण कार्य पूरा न होने की वजह से हरियाणा केवल 1.62 एमएएफ पानी का इस्तेमाल कर रहा है। पंजाब अपने क्षेत्र में एसवाईएल कैनाल का निर्माण कार्य पूरा न करके हरियाणा के हिस्से के लगभग 1.9 एमएएफ जल का गैर-कानूनी ढंग से उपयोग कर रहा है। पंजाब के इस रवैये के कारण हरियाणा अपने हिस्से का 1.88 एमएएफ पानी नहीं ले पा रहा है। इस पानी के न मिलने से दक्षिणी-हरियाणा में भूजल स्तर भी काफी नीचे जा रहा है।