ऑक्सीजन की पूर्ति का इलाज न मिलने से एक दिन के नवजात की मौत, परिजनों की मातम में बदली खुशियां

करनाल

करनाल में कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में एक दिन के नवजात शिशु की वेंटिलेटर न मिलने के कारण मौत हो जाने का मामला सामने आया है। जिसको लेकर नवजात का इलाज करवाने के लिए परिजन अपने हाथ-पैर जोड़कर गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं की गई। जिसके चलते नवजात की मौत हो जाने से परिवार की खुशियां मातम में बदल गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

जानकारी देते हुए असंध वार्ड नंबर 9 निवासी तन्नु ने बताया कि उसने शादीशुदा महिला से शादी थी और उसकी पत्नी काफी उम्मीदों के बाद अब गर्भवती हुई थी। उसकी पत्नी को 2 दिन पहले पेट में दर्द उठा, जिसे इलाज के लिए हमारे द्वारा पानीपत के निजी अस्पताल में लाया गया। जहां डाक्टरों द्वारा 7 माह के गर्भ के बाद ही बच्चे का जन्म करवाया, लेकिन बच्चे में ऑक्सीजन की कमी पाई गई।

जिसकी पूर्ति करने के लिए प्राईवेट अस्पतालों में अधिक खर्च था, इसलिए डाक्टरों ने बच्चे को सिविल अस्पताल में रेफर कर दिया। सिविल अस्पताल में इलाज न मिलने पर डाक्टरों ने करनाल के कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में रेफर कर दिया। वहां भी इलाज न मिलने पर बच्चे को रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया, लेकिन बच्चे ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

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ज्यादा खर्च व डाक्टरों की लापरवाही से हुई बेटे की मौत
तन्नू ने बताया कि जन्म के बाद बेटे के फेफड़ों में पानी भर जाने की जानकारी डाक्टरों द्वारा दी गई थी। जिसके कारण उसकी तबीयत अधिक खराब हो गई। पिता ने रोते हुए आरोप लगाए कि ज्यादा खर्च, पैसों के चक्कर में और डॉक्टरों की लापरवाही के कारण उसके बेटे की मौत हुई है।

मेडिकल कॉलेज से व्यवस्था के बाद भी किया रोहतक रेफर

तन्नू ने बताया कि उसकी पत्नी की पहले से ही एक बेटी है। अब बेटा हुआ था, लेकिन उसको इलाज नहीं मिला। बच्चे को सांस लेने के लिए शीशे में आक्सीजन की जरूरत थी, जो नहीं मिल सकी। हालांकि मेडिकल कॉलेज में एसएनसीयू वार्ड में सभी व्यवस्था है। इसके बाद भी बच्चे को रोहतक के लिए रेफर कर दिया गया।

मरीजों के साथ हो रहे भेदभाव पर संज्ञान ले प्रशासन
पीड़ित पिता ने प्रशासन और सरकार से गुहार लगाई है कि बेटे की मौत के जिम्मेदार दोनों जिलों के डॉक्टर और कॉलेज प्रबंधन हैं। सरकार और प्रशासन को इस मेडिकल कॉलेज में मरीजों के साथ हो रहे भेदभाव पर संज्ञान ले और जांच करके, ताकि किसी की जान तो यह समय रहते बचा सके।