हिसार लोकसभा सीट से सांसद बृजेंद्र सिंह ने उचाना विधानसभा सीट को लेकर हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को खुली चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि किसी के अनुशासन में रहकर हम अपना घर नहीं छोड़ेंगे। उचाना विधानसभा सीट को लेकर लोग अपना वहम निकाल दें। उन्होंने कहा कि पिछले 6 दशकों से उचारा ही हमारा घर है। सांसद बृजेंद्र सिंह ने कहा कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस की टक्कर है। राजस्थान में भाजपा को भारी बहुमत मिल रहा है।
सांसद बृजेंद्र सिंह हरियाणा के जिला कैथल के गुहला चीका स्थित किसान भवन में सर छोटू राम की प्रतिमा का अनावरण करने पहुंचे थे। सर छोटू राम की जयंती पर जन कल्याण ट्रस्ट की ओर से आयोजित कार्यक्रम में हिसार सांसद ने दीनबंधु सर छोटू राम को श्रद्धासुमन अर्पित किए। बृजेंद्र सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि देश का पेट भरने वाला अन्नदाता स्वयं भूखा रहे, यह दुनिया का सबसे बड़ा आश्चर्य है। सांसद ने कहा कि उन्हें खुशी है कि इस कार्यक्रम में आने का उन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ।

सर छोटू राम ने वर्ष 1912 में किया जाट सभा का गठन
सांसद बृजेंद्र सिंह ने कहा कि सर छोटू राम का जन्म 24 नवंबर 1881 को हरियाणा के छोटे से गांव गढ़ी सांपला में एक साधारण परिवार में हुआ। उनका असली नाम रिछपाल था और वह घर में सबसे छोटे थे, इसलिए उनका नाम छोटू राम पड़ गया। बृजेंद्र सिंह ने बताया कि छोटू राम ने अपनी प्राथमिक शिक्षा अपने गांव से पूरी करने उपरांत उच्च शिक्षा दिल्ली में प्राप्त की। सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल करने के उपरांत छोटू राम ने वकालत करते हुए वर्ष 1912 में जाट सभा का गठन किया। प्रथम विश्व युद्ध में उन्होंने रोहतक के 22 हजार से ज्यादा सैनिकों को सेना में भर्ती करवाया था।
नैतिक साहस की मिसाल और किसानों के मसीहा थे सर छोटू राम
सांसद बृजेंद्र सिंह ने कहा कि छोटू राम के मन में शुरू से ही किसानों व दबे कुचले लोगों की आवाज बुलंद करने का जज्बा था। जिसके चलते वह ब्रिटिश शासन में किसानों के अधिकारों के लिए लगातार आवाज बुलंद करते रहे। सर छोटू राम संयुक्त पंजाब प्रांत के सम्मानित नेताओं में से एक थे। उन्होंने वर्ष 1937 के प्रांतीय विधानसभा चुनावों के बाद विकास मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। बृजेंद्र सिंह ने कहा कि सर छोटू राम को नैतिक साहस की मिसाल और किसानों का मसीहा भी माना जाता था, इसलिए उन्हें दीनबंधू की ख्याति से नवाजा गया था।

