एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विश्वविधालय स्तरीय सात दिवसीय एनएसएस कैंप के दूसरे दिन विभिन्न विषय के विशेषज्ञों ने जीवन जीने की कला, अंगदान, फर्स्ट ऐड एवं होम नर्सिंग और तनाव प्रबंधन विषयों पर स्वयंसेवकों को टिप्स देकर अपने अनुभव उनके साथ साझा किए।
जीने की कला में 22 वर्ष का लम्बा अनुभव प्राप्त प्रशिक्षक सुरेन्द्र गोयल ने युवाओं को तनाव मुक्त और आनंद से भरपूर जीवन जीने विषय पर बहुमूल्य टिप्स और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। कॉलेज के पूर्व प्रधान और वरिष्ठ शल्य चिकित्सक डॉ. एसएन गुप्ता ने अंगदान विषय पर ज्ञान और जानकारी स्वयंसेवकों के साथ बांटी। बीआरएम कॉलेज ऑफ एजुकेशन से पधारी प्रशिक्षक डॉ. नीना ने फर्स्ट ऐड एंड होम नर्सिंग पर व्याख्यान दिया। पंजाब नेशनल बैंक के पूर्व मैनेजर रोशन लाल सचदेवा ने ‘तनाव प्रबंधन’ पर व्याख्यान देते हुए युवा स्वयंसेवकों को तनावमुक्त जीवन जीने के तरीके और सलीके सिखाएं।

मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा, कैंप सेक्रेटरी डॉ. राकेश गर्ग और डॉ. संतोष कुमारी ने किया। वहीं 5 से 11 मार्च तक चलने वाले इस आवासीय कैंप में कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र से सम्बद्ध 52 कालेजों के 202 स्वयंसेवकों और प्रोग्राम ऑफिसर ने पंजीकरण कराया है। सभी स्वयंसेवकों के रहने और भोजन की पूर्ण व्यवस्था कॉलेज में ही की गई है। कैंप के दूसरे दिन की शुरुआत प्रात: योग और ध्यान शिविर से हुई जिसमें सभी एनएसएस स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। मंच संचालन डॉ. दीपिका अरोड़ा ने किया। आज एकला नृत्य प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। जिसमें स्वयंसेवक विभिन्न गीतों पर जमकर थिरके।

भूतकाल-भविष्य के बीच डोल रहा मन : सुरेंद्र गोयल
सुरेन्द्र गोयल पूर्व वरिष्ठ मैनेजर नेशनल फर्टिलाईजर लिमिटेड पानीपत एंड वर्सिष्ठ ‘जीवन जीने की कला’ प्रशिक्षक ने कहा कि हमने कभी भी इस बात पर गौर नहीं किया है कि हमारे मन में हर पल क्या चलता रहता है। हमारा मन भूतकाल और भविष्य के बीच में डोलता रहता है। यह या तो भूतकाल में जो बीत गया है, उसमें व्यस्त रहता है या उस भविष्य के बारे में सोचता रहता है, जो अभी आया ही नहीं है।

चेहरे पर फिर से मुस्कान : डा. एसएन गुप्ता
डॉ. एसएन गुप्ता पूर्व कॉलेज प्रधान और वरिष्ठ शल्य चिकित्सक ने ‘अंगदान’ विषय पर बोलते हुए कहा कि हम सभी मरने के बाद भी किसी इंसान को नया जीवन दे सकते हैं और उनके चेहरे पर फिर से मुस्कान ला सकते हैं। हम फिर से किसी को यह दुनिया दिखा सकते हैं। अंगदान करने से हममें एक महान शक्ति पैदा होती है और यह शक्ति अदभुत होती है। इस तरह की उदारता मन की महानता की धोतक है, जो न केवल हमको बल्कि दूसरों को भी खुशी देती है।

प्रशिक्षक ने फर्स्ट ऐड पर दी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग
डॉ नीना फर्स्ट ऐड एंड होम नर्सिंग प्रशिक्षक ने फर्स्ट ऐड पर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देते हुए सिखाया कि किसी भी बीमारी, चोट या दुर्घटना के लिये चिकित्सक या ऐम्बुलेंस आने से पहले जो राहत कार्य और उपचार किया जाता है, उसे ही प्राथमिक सहायता कहते है। किसी भी घायल या बीमार व्यक्ति को अस्पताल तक पहुंचाने से पहले हमें उसकी जान बचाने के लिए अच्छे से प्रयास करना चाहिए और इसका ज्ञान हर एनएसएस स्वयंसेवक को अवश्य होना चाहिए। आपातकाल में पड़े हुए व्यक्ति की जान बचाने के लिए हम आस-पास की किसी भी वस्तु का उपयोग कर सकते हैं।
उच्च तनाव भी जीवन का स्वाभाविक हिस्सा : रोशन लाल
रोशन लाल सचदेवा पूर्व मैनेजर पंजाब नेशनल बैंक पानीपत ने ‘तनाव प्रबंधन’ पर बोलते हुए कहा कि तनाव इंसान के जीवन का अटूट हिस्सा है और यह हमें किसी भी कार्य को पूरा करने के लिए प्रेरित भी कर सकता है । यहां तक कि गंभीर बीमारी, नौकरी छूटना, परिवार में मृत्यु या किसी दर्दनाक घटना से उच्च तनाव भी जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा हो सकता है। तनाव में हम उदास या चिंतित महसूस कर सकते हैं, और परन्तु इससे हम सामान्य व्यवहार करके निपट भी सकते है।
ये रहे मौजूद
डॉ. राकेश गर्ग प्रोग्राम ऑफिसर ने कहा कि कैंप में स्वयंसेवक वित्तीय, जल संरक्षण, प्रदूषण और पर्यावरण संतुलन, स्वच्छता, लैंगिक समानता, साक्षरता, परिवार कल्याण और पोषण, महिलाओं की स्थिति एवं इसके सुधार के उपाय, आपदा राहत तथा पुनर्वास, समाज में व्याप्त बुराईयां, डिजिटल भारत, कौशल भारत, योग आदि जैसे विषयों पर व्यावहारिक ज्ञान एवं प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इस मौके पर डॉ. संगीता गुप्ता, डॉ. संतोष कुमारी, डॉ. एसके वर्मा, डॉ. मुकेश पुनिया, डॉ. राकेश गर्ग, डॉ. पवन कुमार, डॉ. दीपिका अरोड़ा, प्रो. मनोज कुमार, प्रो. विशाल गर्ग, प्रो. आशीष गर्ग, प्रो. सोनिका शर्मा, प्रो. पूजा धींगडा, दीपक मित्तल, चिराग सिंगला उपस्थित रहे।