Sonipat जिला परिषद के अधिकारों की मांगों को लेकर जिला पार्षद संजय बड़वासनी ने 72 घंटे की भूख हड़ताल शुरू की है जहां जिला परिषद कार्यालय के सामने 72 घंटे के लिए टेंट लगाकर भूख हड़ताल शुरू की गई है। जिला पार्षद संजय बड़वासनी समेत जिला परिषद समिति के मेंबरों ने मांगों को लेकर विरोध जताया है।

वहीं उन्होंने पंचायत विभाग के कई अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मांग उठाई है कि सरकार उन्हें उनके अधिकार दे और उन्हें पैसे खर्च करने के लिए ताकत दे। वहीं उन्होंने यह भी कहा है कि गांव में जनप्रतिनिधि होने के नाते लोगों के काम नहीं करवा पा रहे हैं।

गांव के विकास के लिए काफी वायदे किए गए थे
जिला परिषद एवं ब्लॉक समिति सदस्यों को अधिकार एवं ताकत दिए जाने की मांग को लेकर जिला पार्षद संजय बडवासनी ने जिला परिषद कार्यालय के सामने 72 घंटे की भूख हड़ताल शुरू कर दी है। जिला पार्षद संजय बडवसनीय ब्लॉक समिति सदस्य संजय प्रवासिनी को समर्थन करते हुए मांगों को लेकर विरोध कर रहे हैं।

भूख हड़ताल पर बैठे जिला पार्षद संजय बड़वासनिया कहा कि पंचायती राज की सबसे बड़ी संस्था होते हुए भी जिला पार्षद एवं ब्लॉक समिति सदस्यों को कोई भी अधिकार सरकार की तरफ से नहीं दिए गए हैं। गांव में अपने स्तर पर एक ईट लगाने में भी सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार या तो इन दोनों संस्थाओं को ताकत दे, अन्यथा भंग कर दे। चुनाव से पहले गांव के विकास के लिए काफी वायदे किए गए थे, लेकिन ताकत ना होने के कारण और खुद का बजट न होने के कारण आज गांव में विकास कार्य करवाने में सक्षम नहीं है।
प्लान कमेटी का गठन किया जाए
उन्होंने कहा है कि सरकार द्वारा जो टेबल बनाई गई है उसे भी भंग किया जाए। सरपंच ब्लॉक समिति सदस्य जिला परिषद सदस्य सभी कार्य करवाने में सक्षम हो, उन्होंने मांग कि है जिला प्लान कमेटी का गठन किया जाए ताकि जिला पार्षद को और ताकत मिले जिला पार्षद फंड से अतिरिक्त प्रत्येक वर्ष एक करोड़ रूपया ब्लॉक समिति सदस्यों को प्रतिवर्ष 50 लाख रुपए अपने स्तर पर विकास कार्य करवाने के लिए जारी किया जाना चाहिए।

चुनाव से पहले भी प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री नायब सैनी जी से मुलाकात की थी और उन्होंने आश्वासन दिया था कि आपकी मांगों को पूरा किया जाएगा, लेकिन उन मांगों में से किसी भी मांग को पूरा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि विकास कार्य की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो। अगर सरकार ने हमारी मांगे नहीं मानी तो हम आमरण अनशन पर बैठने से भी पीछे नहीं हटेंगे।







