हरियाणा के डीजीपी पीके अग्रवाल का कार्यकाल पूरा हो चुका है। उन्हें 14 अगस्त को मधुबन में सम्मान के साथ विदाई दे दी गई है। लेकिन सीएम मनोहर लाल खट्टर की ओर से अभी तक नए डीजीपी का नाम फाइनल नहीं किया गया है।
इस बार डीजीपी के नाम को लेकर जितनी होड़ हो रही है, उतनी शायद पहले कभी भी नहीं हुई। हालांकि यूपीएससी की ओर से तीन नाम फाइनल किए गए हैं जोकि सरकार को वापस भेज दिए गए हैं। अब फैसला सीएम के हाथ में है।
नाम फाइनल करने में इतनी देर क्यों लग रही है?
डीजीपी के नाम फाईनल होने में इतना वक्त इसलिए लग रहा है क्योंकि डीजीपी का पद आईपीएस आरसी मिश्रा और आईपीएस शत्रुजीत कपूर के बीच फंस रहा है। दोनो का ही अपना-अपना मजबूत पक्ष है।
जहां एक पक्ष चाह रहा है कि डीजीपी के पद पर आरसी मिश्रा को बैठाया जाए, वहीं दूसरा पक्ष चाहता है कि शत्रुजीत कपूर को इसका मोका दिया जाए। इसी कारण से डीजीपी पद को फाइनल करने में मुश्किलें आ रही है।
आरएसएस चाहती है आरसी मिश्रा डीजीपी बने
आरएसएस का यूपी गुट चाहता है कि आरसी मिश्रा को डीजीपी के पद पर बैठाया जाए। आईपीएस मिश्रा यूपी से हैं और इसके साथ ही ब्राह्मण समुदाय के आईएएस अधिकारी भी चाह रहे हैं कि वह डीजीपी बने।
साथ ही एक वजह यह भी है कि मिश्रा का व्यवहार बिल्कुल नर्म है। जिस तरह के प्रदेश में हालात बने हुए हैं, इसे संभालने के लिए वह योग्य बताए जा रहे हैं।
सीएम की पसंद शत्रुजीत कपूर
लेकिन बात करें सीएम खट्टर की तो वह चाहते हैं कि इस पद पर शत्रुजीत कपूर को बैठाया जाए। इसकी वजह यह है कि वह तेज तर्रार अधिकारी हैं। इस वजह से वह सीएम की गुड बुक्स में हैं। लेकिन जैसे की वह पंजाबी समुदाय से हैं, यह उनकी राह को मुश्किल कर रहा है। क्योंकि इस वक्त भाजपा चुनाव में जाने की तैयारी कर रही है, इसलिए भाजपा किसी भी तरह के विवाद में नहीं पड़ना चाह रही है।
इस मुद्दे को लेकर कभी इतनी उत्सुकता नहीं रही लेकिन इस बार अलग ही माहोल है। बताया जा रहा है कि सीएम आज कुछ देर में इस बात पर निर्णय लेंगे। लेकिन तब तक कयास व संभावनाओं का दौर जारी है।

