उत्तर भारत के सबसे बड़ा कपालमोचन मेले के चौथे दिन शाही स्नान के साथ बहुत से श्रद्धालु घर लौट गए हैं। ठीक 12 बजते ही आकाश एकदम से रंग बिरंगा हो गया और जमकर आतिशबाजी की गई। कपाल मोचन मेले में कार्तिक पूर्णिमा की रात शाही स्नान किया जाता है। मान्यता है कि शाही स्नान करने से सभी दुख दूर हो जाते हैं। कपाल मोचन में सिर्फ एक सरोवर नहीं है बल्कि कई सरोवर है। श्रद्धालुओं ने सभी सरोवरों पर स्नान किया और मनोकामनाएं मांगी। रात के 12 बजते ही सभी सरोवर पर आतिशबाजी की गई। श्रद्धालु एकदम से आस्था की डुबकी लगाने लगे।

जिस तरह से कुंभ मेले की शुरुआत साधुओं के स्नान के बाद होती है, उसी तरह कपालमोचन मेले का शुभारंभ साधु प्रवेश शाही स्नान के साथ किया जाता है। संत एकादशी पर पहला स्नान इसलिए करते हैं, क्योंकि साधु अपनी जिंदगी में जो तप करते हैं, स्नान करने से उसकी शक्तियां सरोवरों के पानी में मिल जाती हैं। इससे इन सरोवरों में स्नान करने का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है। कपालमोचन का न सिर्फ हरियाणा बल्कि पूरे देश में अपना अलग महत्व है। कपालमोचन ऋषि मुनि व तपस्वियों की धरती रही है। साधु संतों के अलावा भगवान शिव, श्री राम, पांडव व श्री गुरु नानक देव जी व गुरु गोबिंद सिंह जी ने यहां पर कदम रखकर इस धरती को पवित्र किया है।
लंबे समय से मेले में पहुंच रहे श्रद्वालु
श्रद्धालु ने बताया कि कपाल मोचन आने से हमारे हर दुख दूर हो जाते हैं। हम यहां जो मन्नत मांगते हैं वह पूरी होती है। ऐसा नहीं है कि हम पहली बार इस मेले में आए हैं। हम लंबे समय से इस मेले में आ रहे हैं और आगे भी आते रहेंगे। अधिकारियों का कहना है कि इस मेले में करीब 10 लाख लोग पहुंचेंगे। आपको बता दें कि कपाल मोचन मेले में पंजाब-हरियाणा, हिमाचल, उत्तर प्रदेश सहित देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां पर आते हैं।

