Ashutosh Rana Birthday Special : आशुतोष राणा का नंबर बॉलीवुड के दमदार सितारों में आता है। वह कई फिल्मों में अलग-अलग किरदार निभाकर अपने प्रशंसकों को प्रभावित कर चुके हैं। खलनायकी के रोल में आशुतोष राणा को सबसे ज्यादा बहुत पसंद किया गया है। 10 नवंबर को आशुतोष राणा का जन्मदिन होता है। इस खास मौके पर आपको आशुतोष राणा की पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ के बारे में बताते हैं। ऐसा समय भी रहा है, जब उनकी खलनायकी के आगे हीरो भी उनके सामने फीक पड़ गए थे।
ऐसा बहुत ही कम लोगों को ज्ञात है कि आशुतोष राणा अभिनेता नहीं, बल्कि नेता बनना चाहते थे। इसके लिए वह छात्र संगठन से भी जुड़े। वहीं लोगों को लगता था कि आशुतोष राणा परीक्षा में पास नहीं हो पाएंगे। हालांकि जब परीक्षा का परिणाम आया तो आशुतोष फर्स्ट डिवीजन में पास हुए। उनकी मार्कशीट को ट्रॉली में रखकर बैंड बाजे के साथ नगर में घुमाया गया था। 10 नवंबर 1967 को मध्य प्रदेश में जन्में आशुतोष राणा ने अपनी जिंदगी के कई बड़े फैसले खुद ही किए हैं। यहां तक कि अपना नामकरण भी उन्होंने खुद ही किया।

आशुतोष ने अपने एक साक्षात्कार में खुलासा किया था कि जब वह मात्र साढ़े 3 साल के थे, तब उन्होंने खुद अपना नाम रख लिया था। दरअसल उस समय वह अपने माता-पिता के साथ एक पूजा में बैठे थे। तब तक उनका नामकरण नहीं था, लोग उन्हें सिर्फ राणा जी बुलाते थे। बता दें कि घर में पूजन के दौरान पंडित जी ने ॐ आशुतोषाय नमः का जाप किया तो राणा जी इस मंत्र से इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने अपना नाम आशुतोष रख लिया।
आशुतोष जब पहली बार महेश भट्ट से मिले तो उनके पांव छू लिए। यह बात महेश भट्ट को पसंद नहीं आई थी। उन्होंने इसके लिए आशुतोष को आगे से ऐसा करने से मना कर दिया था। हालांकि कुछ वर्षों बाद महेश भट्ट को यह रियलाइज हुआ कि पैर छूना हमारी सभ्यता है। उन्होंने आशुतोष से इस बात का फिर जिक्र भी किया।

गुरुदेव देवप्रकाश शास्त्री ने बदल दी आशुतोष राणा की जिंदगी
आशुतोष राणा के जीवन में उनके गुरुदेव देवप्रकाश शास्त्री (आशुतोष इन्हें प्यार से दद्दा जी कहते हैं) की अहम भूमिका रही है। आशुतोष ने अपने जीवन के सभी बड़े फैसले उनके कहने पर ही लिए हैं। शास्त्री ने आशुतोष को महेश भट्ट से मिलने का सुझाव दिया था। आशुतोष का कहना है कि मध्य प्रदेश की सागर यूनिवर्सिटी से उन्होंने स्नातक की डिग्री पूरी की।
इस दौरान उनकी मुलाकात देवप्रकाश शास्त्री से हुई। शास्त्री ने ही आशुतोष को दिल्ली जाकर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला लेने का सुझाव दिया था। सौभाग्य इतना तेज था कि पहले प्रयास में ही आशुतोष का दाखिला वहां हो गया। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से पास आउट होने के बाद वह फिर अपने गुरुदेव से मिले। उन्होंने कहा कि अब उन्होंने दिल्ली छोड़कर मुंबई जाने की बात कहीं और महेश भट्ट से मिलने के लिए कहा। इसके बाद आशुतोष ने आव देखा न ताव और 17 जून 1994 को मुंबई पहुंच गए।

मन में थी नेता बनने की चाह, भगवान को था कुछ और मंजूर
आशुतोष के अनुसार उन्होंने सागर यूनिवर्सिटी में दाखिला इसलिए लिया था कि वह छात्र संगठन में शामिल हो जाएं। वह अभिनेता नहीं नेता बनने की चाह मन में रखते थे। ऐसे में भगवान को कुछ और ही मंजूर था। गुरुदेव के रूप में उन्होंने देवप्रकाश शास्त्री की दिखाई राह पर चलने का निर्णय लिया तो आज बॉलीवुड में अपनी अलग ही छाप छोड़ दी। आशुतोष का कहना है कि योजना बनाना ईश्वर का काम है, लेकिन हमें उस योजना के हिसाब से अपना कर्म करना है।
उनका कहना है कि खुद की बनाई योजना पर कभी कामयाबी हासिल नहीं होती। हमें सब कुछ भगवान पर छोड़ देना चाहिए। उनका कहना है कि कक्षा 11वीं के दौरान उन्होंने नेतागिरी करनी शुरू कर दी थी। लोगों को भी लगने लगा था कि वह इतने नेतागिरी में रम गए हैं कि परीक्षा में भी पास नहीं हो पाएंगे। हालांकि जब परीक्षा का परिणाम आया तो आशुतोष फर्स्ट डिवीजन में पास हुए। हर कोई हैरान रह गया था।

जानिए आशुतोष राणा की प्रोफेशनल लाइफ
आशुतोष राणा बॉलीवुड के साथ-साथ मराठी, कन्नड, तेलुगू और तमिल फिल्म उद्योगों में भी कार्य कर रहे हैं। इन्होंने काली-एक अग्निपरीक्षा नामक धारावाहिक में भी अभिनय किया है। आशुतोष को वर्ष 1998 से 2000 तक फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक पुरस्कार मिल चुके हैं। वर्ष 1999 में आशुतोष को फिल्म दुश्मन से और वर्ष 2000 में फिल्म संघर्ष से फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक पुरस्कार मिल चुका है।
अक्षय कुमार और प्रीति जिंटा की फिल्म ‘संघर्ष’ वर्ष 1999 में रिलीज हुई थी। इसमें आशुतोष राणा ने खलनायक लज्जा शंकर पांडे का किरदार निभाकर लोगों के होश उड़ा दिए थे। इसमें आशुतोष राणा का अब तक श्रेष्ठ परफॉर्मेंस कहा जा सकता है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक साइको किलर बच्चों को किडनैप करता है और फिर अमर होने के लिए उनकी बलि देता है।
इमरान हाशमी की वर्ष 2007 में रिलीज हुई फिल्म ‘आवारापन’ काफी चर्चा में रही है। फिल्म में आशुतोष राणा खलनायक बने थे। उन्होंने गैंगस्टर मलिक का रोल निभाया था। इसमें आशुतोष राणा की एक्टिंग को खूब सराहा गया। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने अच्छा-खासा बिजनेस किया था।

संघर्ष की सुंदर परिभाषा देकर उसे बताया कर्म
आशुतोष राणा ने एक साक्षात्कार में संघर्ष की एक सुंदर परिभाषा देते हुए कहा कि संघर्ष का अर्थ हर्षित मन से किया जाने वाला कर्म होता है। आप संघर्ष अपनी इच्छा से करते हैं। मुझे फिल्म इंडस्ट्री की जरूरत थी, फिल्म इंडस्ट्री को मेरी जरूरत नहीं थी। इसलिए यहां तक आने में जो भी संघर्ष किया, वो मैंने किसी दूसरे के लिए, बल्कि खुद अपने लिए किया है। यह संघर्ष कभी रुकने वाला तो नहीं है। यह तो जीवन पर्यंत चलेगा। मुझे आज भी लोग कहते हैं कि आपको आपकी योग्यता के अनुरूप वो सम्मान या दर्जा नहीं मिला। मैं उन्हें इस बात के लिए धन्यवाद देता हूं। कम से कम लोग यह तो नहीं कहते हैं कि मुझे अपनी योग्यता से ज्यादा मिल गया है।