संसद की सुरक्षा में बड़ी लापरवाही के मामले में आरोपी ललित झा ने दिल्ली के एक थाने में सरेंडर कर दिया है। इस घटना में पुलिस चार आरपियों को पहले ही अरेस्ट कर चुकी है। आरोपी ललित झा ने कर्तव्य पथ थाने पहुंचा और सरेंडर कर दिया। पुलिस ने दोनों को स्पेशल सेल को सौंप दिया है। बताया जा रहा कि ललित दिल्ली से राजस्थान के नागौर भागा था। वह बस पकड़कर राजस्थान गया था। वहां पहुंचने के बाद उसने होटल में रात बिताई थी। फिर वह महेश नाम के शख्स के ठिकाने पर पहुंचा था। महेश को भी 13 दिसंबर को दिल्ली संसद भवन आना था। महेश को इस साजिश की पूरी जानकारी थी। महेश के साथ ही ललित दिल्ली आया और सरेंडर कर दिया। महेश को भी दिल्ली पुलिस तलाश कर रही थी।
पुलिस ने बताया कि घटना का वीडियो बनाने के बाद ललित ने उसे इंस्टाग्राम पर डाला और कोलकाता के एनजीओ को भेजा ताकि ये मीडिया तक पहुंच सके। इसके बाद वह मौके से फरार हो गया था। वह अपने साथियों के मोबाइल फोन भी ले गया था, जिसे उसने जला दिया। ताकि सबूत मिटाए जा सके। दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम शनिवार या रविवार को संसद में सूरक्षा चूक के सीन को रीक्रिएट करेगी। सूत्रों के मुताबिक, इसके लिए सभी आरोपियों को संसद परिसर ले जाया जाएगा। इससे दिल्ली पुलिस ये पता लगाएगी कि आरोपी कैसे संसद भवन में दाखिल हुए और कैसे अपने प्लान को अंजाम दिया।

पांच आरोपियों को पहले कर चुकी पुलिस गिरफ्तार
इस घटना में पुलिस पांच आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। जानकारी के मुताबिक संसद तक 5 आरोपी आए थे। इसमें सागर, मनोरंजन, नीलम और अमोल शिंदे के साथ ललित झा भी था। लेकिन जैसे ही हंगामा हुआ, ललित मौके से फरार हो गया था। ललित के पास ही इन चारों के मोबाइल फोन भी थे। जिसे उसने जला दिया। ताकि सबूत मिटाए जा सके।
ससंद के बाहर प्रदर्शन का वीडियो ललित ने बनाया
बता दें कि जब दो आरपी सागर और मनोंरजन डी संसद में कार्रवाही के दौरान अंदर घुसे थे और दो आरोपी नीलम और अमोल शिंदे बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। तब ललित भी संसद के बाहर ही मौजूद था। उसने आरोपी नीलम और अमोल द्वारा संसद के बाहर किए गए प्रदर्शन और नारेबाजी का वीडियो बनाया था। उसके पास सभी के फोन थे। उसने इस वीडियो को अपने एनजीओ पार्टनस व्हाट्सऐप भी किया था। इसके बाद वहां से फरार हो गया।

एनजीओ का जनरल सेक्रेट्री है ललित
वह यहां के एक एनजीओ साम्यवादी सुभाष सभा का जनरल सेकेट्री बताया जा रहा है। घटना के बाद उसने एनजीओ के फाउंडर नीलाक्ष को भी घटना का वीडियो शेयर किया था। पुलिस अब साम्यवादी सुभाष सभा नाम के इस एनजीओ की भी जांच कर रही है। इस एनजीओ के फंडिंग सोर्स का पुलिस पता लगा रही है। जानकारी के मुताबिक जिस नीलाक्ष नाम के युवक को ललित ने इस घटना का वीडियो शेयर किया था, वह नॉर्थ चौबीस परगना का रहने वाला है। उसने बताया कि वो ललित से कोलकाता में एक सेमिनार में मिला था। नीलाक्ष ने बताया कि वह बहुत मेहनत से काम कर रहा था, इसलिए नीलाक्ष ने उसे भी एनजीओ से जोड़ लिया था।

ललित झा की तृणमूल कांग्रस नेता के साथ तस्वीरें हो रही वायरल
संसद की सुरक्षा उल्लंघन का मास्टरमांइड ललित झा की तृणमूल कांग्रेस नेता के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया मे वायरल हो रही है। भाजपा इसके लिए टीएमसी सहित पूरे विपक्ष को घर रही है। भगवा पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस सहित पूरे इंडिया गठबंधन पर इस कांड में शामिल होने का आरोपी लगाया है। वहीं टीएमसी ने भाजपा के मैसूर से सांसद पर दोनों घुसपैठियों को पास जारी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया है।
मैसूर के सांसद प्रताप सिम्हा उस समय से विवादों में है जब यह पता चला कि उनके कार्यालय ने सागर शर्मा और मनोरंजन डी के लिए विजिटर्स पास के लिए अनुरोध किया था। इन दोनों ने ही संसद की दर्शक दीर्घा से लोगसभा चैंबर में घुसपैठ की थी। उन्होंने कार्यवाही के बीच में ही सदन के अंदर कैन से रंगीन गैस छोड़ी थी। उनमें से एक गैलरी से लोकसभा के फर्श पर कूद गया। सांसदों और सूरक्षाकर्मियों ने दोनों पर काबू पा लिया था। इस पूरी घटना का मारस्टमाइंड बंगाल के ललित झा को बताया जा रहा है।

बंगाल भाजपा प्रमुख डॉ. सुकांतों मजूमदार ने वरिष्ठ तृणमूल नेता तापस रॉय के साथ ललित झा की एक तस्वीर पोस्ट की है। उन्होंने कैप्शन में लिखा है कि “हमारे लोकतंत्र के मंदिर पर हमले का मास्टमाइंड ललित झा लंबे समय से टीएमसी के तापस रॉय के साथ घनिष्ठ संबंध में है। क्या यह टीएमसी नेता की मिलीभगत की जांच के लिए पर्याप्त सबूत नही है?”
इसमें भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी पोस्ट किया है। उन्होंने आरोप लगाया, अब तक पूरे प्रकरण में शामिल लोगों के कांग्रेस, सीपीआई और अब टीएमसी के साथ संबंध पाए गए है। ममता की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने पटलवार करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा की आंतरिक विफलताओं के कारण संसद की सुरक्षा में यह अभूतपूर्व उल्लंघन हुआ है।

सुरक्षा चुक के चलते इन सुरक्षाकर्मियों को किया सस्पेंड
सुरक्षा में चूक के चलते संसद सचिवालय ने गुरुवार को 8 सुरक्षाकर्मियों को सस्पेंड कर दिया। इनके नाम रामपाल, अरविंद, वीर दास, गणेश, अनिल, प्रदीप, विमित और नरेंद्र हैं। संसद में बुलेट प्रूफ एनक्लोजर, विजिटर गैलेरी में ग्लास और अन्य सुरक्षा उपकरण लगाए जाएंगे। इनकी लागत 35 करोड़ रुपए के आसपास होगी। संसद में प्रवेश करने वाले विजिटर्स की फ्रिस्किंग (जामा तलाशी) की जा रही है। जूते भी खुलवाए जा रहे हैं। राज्य सभा सचिवालय ने सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के आचरण की जांच का मामला संसद की विशेषाधिकारी कमेटी को भेजा है। तीन महीने में रिपोर्ट मांगी गई है। सस्पेंशन के विरोध में ब्रायन देर शाम तक संसद में धरने पर बैठे रहे।

कोर्ट ने आरोपियों को 7 दिन की कस्टडी में भेजा
वहीं 13 दिसंबर को संसद में घुसपैठ करने वाले दो आरोपियों और उनके दो सहयोगियों को गुरुवार को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने चारों को 7 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। चारों आरोपियों के खिलाफ यूएपीए की कार्रवाई भी की गई। दिल्ली पुलिस ने कहा है- ये प्लांड अटैक था।