BJP नेता कुलदीप बिश्नोई ने पार्टी से दूरी बना रखी है। वह न तो भाजपा की बैठकें और न ही किसी पार्टी कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं। वहीं, भाजपा ने भी उन्हें महत्व देना कम कर दिया है। पार्टी अब कार्यक्रमों और बैठकों में उन्हें निमंत्रण नहीं भेज रही है। मुख्यमंत्री नायब सैनी के हिसार दौरे के दौरान उनकी उपस्थिति की संभावना भी कम दिख रही है।
विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन से गिरा कद
भाजपा ने कुलदीप बिश्नोई को विधानसभा चुनाव के लिए प्रबंधन समिति का संयोजक बनाया था। उन्होंने आदमपुर और फतेहाबाद समेत कई सीटों पर जीत का दावा किया, लेकिन वह आदमपुर और नलवा तक सीमित रह गए। उनके बेटे भव्य बिश्नोई आदमपुर से हार गए, जिसके बाद भाजपा में उनका कद गिरता हुआ नजर आया।
राज्यसभा सीट पर जताई दावेदारी
बेटे की हार के बाद कुलदीप ने राज्यसभा सीट के लिए दावेदारी की और परिवार सहित दिल्ली में भाजपा के केंद्रीय नेताओं से मुलाकात की। लेकिन भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली ने साफ किया कि जिसका नाम मीडिया में पहले आ जाता है, उसकी दावेदारी कमजोर हो जाती है। इससे कुलदीप को राज्यसभा सीट की संभावना भी क्षीण होती नजर आई।
कांग्रेस में जाने की अटकलें
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कुलदीप बिश्नोई कांग्रेस के हुड्डा विरोधी गुट से संपर्क में हैं। उनके बड़े भाई चंद्रमोहन बिश्नोई कांग्रेस विधायक हैं और कुमारी सैलजा के करीबी माने जाते हैं। हरियाणा में कांग्रेस की हार के बाद यह चर्चा है कि सैलजा गुट में किरण चौधरी की जगह कुलदीप फिट हो सकते हैं। हालांकि, कुमारी सैलजा ने इस बारे में कहा कि कुलदीप बिश्नोई के कांग्रेस में आने की जानकारी उन्हें नहीं है।
भाजपा से किनारा करने की वजह
कुलदीप बिश्नोई की पार्टी से दूरी का एक कारण आदमपुर चुनाव में हार है, जिससे भाजपा में उनका कद कम हुआ। भाजपा के सदस्यता अभियान और अन्य बैठकों में उन्हें जगह न मिलने से भी वह नाराज दिख रहे हैं। वहीं, राज्यसभा की उम्मीद खत्म होते देख वह दूसरी राजनीतिक संभावनाओं की तलाश में है।







