Haryana Lok Sabha Elections 2024

Haryana Politics : भाजपा के बाद कांग्रेस के खुले पत्ते, रिपोर्ट से चुनावी रण में 8 सीटों पर जीत का दावा, 2 सीटों पर प्रत्याशियों के ढेर होने की संभावना

राजनीति पंचकुला

Haryana Politics : हरियाणा में लोकसभा चुनाव के तहत मतदान के बाद भाजपा के बाद अब कांग्रेस पार्टी ने भी अपने पत्ते खोल दिए हैं। कांग्रेस की इंटरनल रिपोर्ट में काफी चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। माना जा रहा है कि कांग्रेस 8 सीटों पर अपना दबदबा मान रही है। पार्टी अब तक के मंथन में 4 सीटों पर अपनी जीत पक्की मान रही है, वहीं 3 लोकसभा सीटों पर कड़ी टक्कर बताई जा रही है। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कांग्रेस प्रदेश की 2 लोकसभा सीटों पर चुनावी रण हारती नजर आ रही है। साथ ही 1 सीट पर बढ़त बताई जा रही है।

गौरतलब है कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा प्रदेश कांग्रेस और दिल्ली शीर्ष नेतृत्व के मंथन से पहले पार्टी के विधायकों से सभी 10 लोकसभा सीटों का फीडबैक ले चुके हैं। जिसमें पार्टी के 30 विधायकों ने गठबंधन सहित सभी 10 सीटों पर कड़ी टक्कर बताई है। विधायकों ने फीडबैक में बताया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़े मतदान प्रतिशत से शहरों के मुकाबले कांग्रेस को बड़ी बढ़त मिली है। यह जल्द होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अच्छा संकेत बताया है। विधायकों से फीडबैक लेने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा दावा कर चुके हैं कि हरियाणा में गठबंधन सभी 10 सीटों पर अपनी जीत दर्ज करेगा।

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बता दें कि रोहतक सीट पर कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा को प्रत्याशी बनाया है। उधर भाजपा ने पूर्व सांसद डॉ. अरविंद शर्मा को चुनावी रण में उतारा है। लोकसभा चुनाव में 65.68 प्रतिशत मतदान हुआ, जो वर्ष 2019 के मुकाबले 4.83 फीसदी कम है। कांग्रेस की रिपोर्ट में दावा है कि इस सीट को सबसे अच्छे अंक मिले हैं। साथ ही भाजपा को जाटों और किसानों के विरोध के चलते नुकसान की बात सामने आई है। बता दें कि रोहतक से दीपेंद्र हुड्‌डा 3 बार सांसद रह चुके हैं। वर्ष 2014 में मोदी लहर के बाद भी दीपेंद्र यहां से चुनाव जीत गए थे, जबकि इस बार हुड्डा परिवार में पूरी जोर आजमाइश की है।

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सोनीपत लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने सतपाल ब्रह्मचारी पर विश्वास जताया है, भाजपा ने अपने पूर्व सांसद रमेश चंद्र कौशिक को दरकिनार कर विधायक मोहनलाल बड़ौली को चुनावी मैदान में उतारा है। सतपाल ब्रह्मचारी सन्यासी हैं और हरिद्वार में उनके आश्रम हैं। मूलतः वह जींद के गांव गांगोली निवासी है। जिसका फायदा उन्हें मिलता दिखाई दे रहा है। वहीं भाजपा यहां भीतरघात का शिकार बताई जा रही है।

इसके अलावा धर्म नगरी कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट की बात करें तो आम आदमी गठबंधन के साथ वाली कुरुक्षेत्र सीट पर अच्छी बढ़त बताई जा रही है। इस सीट पर भाजपा, इंडिया गठबंधन और इनेलो में त्रिकोणीय मुकाबला बताया जा रहा है। भाजपा ने कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट पर उद्योगपति नवीन जिंदल, कांग्रेस-आप गठबंधन ने डॉ. सुशील गुप्ता और इनेलो ने राष्ट्रीय महासचिव अभय सिंह चौटाला को चुनावी रण में उतारा है।

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वहीं सिरसा सीट पर वर्ष 2019 के मुकाबले 6.21 फीसदी कम वोटिंग हुई। यहां कांग्रेस ने पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एवं 2 बार की सांसद कुमारी सैलजा को मैदान में उतारा है। उनकी मजबूती का कारण उनके पिता चौधरी दलबीर सिंह सिरसा में कांग्रेस के बड़े नेता थे। कांग्रेस की इंटरनल रिपोर्ट में किसानों और जाटों ने एकजुट होकर पार्टी कैंडिडेट के पक्ष में वोटिंग करने की बात कही गई है। उधर भाजपा प्रत्याशी अशोक तंवर की हार का कारण विरोध माना जा रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी बदलने को लेकर यहां के लोगों ने उनका काफी विरोध किया।

भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट कांग्रेस की इंटरनल रिपोर्ट में विजेता सूची में शामिल है। यहां कांग्रेस ने विधायक राव दान सिंह को भाजपा के पूर्व सांसद धर्मबीर सिंह के सामने उतारा है। वहीं 15 वर्षों में इस सीट पर सबसे कम मतदान हुआ है। जिसके तहत कांग्रेस यहां अपनी जीत पक्की मान कर चल रही है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों से बढ़े मतदान प्रतिशत की रिपोर्ट कांग्रेस के पक्ष में बताई जा रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कांग्रेस प्रत्याशी की विधानसभा में सबसे अधिक और भाजपा के राज्य मंत्री डॉ. अभय सिंह की नांगल चौधरी सीट पर कम मतदान हुआ है।

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वहीं करनाल और गुरुग्राम सीट पर कांग्रेस अपनी हार स्वीकार करती नजर आ रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि करनाल में भाजपा ने अपने दिग्गज एवं पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल को प्रत्याशी के रूप में उतारा है, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी यहां नया चेहरा थे। इस सीट पर भाजपा का जीत का मार्जिन 2 लाख से अधिक का हो सकता है। उधर गुरुग्राम सीट पर 5 बार सांसद रह चुके राव इंद्रजीत सिंह भाजपा प्रत्याशी हैं। वहीं कांग्रेस ने फिल्म अभिनेता राज बब्बर पर अपना कार्ड खेला है। राव इंद्रजीत का केंद्र सरकार में मंत्री रहना उनके पक्ष में माना जा रहा है। वह लोगों के बीच काफी सक्रिय रहने वाले नेता भी हैं। यहां पार्टी नेताओं का साथ और बब्बर के पक्ष में रैली न होना भी हार का कारण बन सकता है।

इसके अलावा कांग्रेस की रिपोर्ट में अंबाला, हिसार और फरीदाबाद सीट पर कड़ी टक्कर बताई जा रही है। अंबाला में पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत राम रत्न कटारिया की पत्नी बंतो कटारिया भाजपा प्रत्याशी है, उनके सामने कांग्रेस के वरुण मुलाना चुनावी रण में कड़ी टक्कर दे रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण भाजपा का ग्रामीण क्षेत्रों में विरोध रहा। वहीं हिसार में कांग्रेस उम्मीदवार जयप्रकाश जेपी की रिपोर्ट अच्छी नहीं है। यहां इनेलो और जेजेपी मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। इसका कारण कांग्रेस प्रत्याशी का चुनाव प्रचार काफी कमजोर माना जा रहा है। ऐसे में भाजपा के रणजीत चौटाला और जेजेपी से नैना चौटाला अपना रास्ता साफ करती नजर आ रही हैं। फरीदाबाद सीट पर भाजपा के कृष्णपाल गुर्जर, कांग्रेस से महेंद्र प्रताप सिंह चुनावी रण में उतरे हैं। इस सीट पर कृष्णपाल को अपनी छवि का फायदा मिल सकता है।

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