Sant Nirankari Mission

Sant Nirankari Mission : सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज का संदेश, हर पल में निरंकार के प्रति समर्पित होकर जीयें जीवन

धर्म-कर्म सोनीपत

Sant Nirankari Mission : सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने कहा कि जब हम हर पल में इस निरंकार प्रभु के प्रति पूर्ण समर्पित भाव से अपना जीवन जीते चले जाते हैं, तब वास्तविक रूप में मानवता के कल्याणार्थ हमारा जीवन समर्पित हो जाता है। ऐसा ही प्रेमा-भक्ति से युक्त जीवन बाबा हरदेव सिंह ने हमें स्वयं जीकर दिखाया। यह आशीष वचन सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने समर्पण दिवस के पावन अवसर पर व्यक्त किए।

पानीपत के खंड समालखा स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर बाबा हरदेव सिंह की पावन स्मृति में समर्पण दिवस समागम का आयोजन किया गया। इस दौरान सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज व निरंकारी राजपिता के सान्निध्य में संत निरंकारी मिशन से जुड़े श्रद्धालुओं ने भाग लिया। जिसमें दिल्ली, एनसीआर सहित पड़ोस के राज्यों से भी काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सभी ने उनके परोपकारों को न केवल स्मरण किया, अपितु हृदयपूर्वक श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके अतिरिक्त निरंकारी अनुयायियों ने विश्वभर में भी समर्पण दिवस मनाकर बाबा की सिखलाए विचारों का का स्मरण करते हुए उनके जीवन को नमन किया।

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सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने मानवता के मसीहा बाबा हरदेव सिंह की सिखलाईयों का जिक्र करते हुए बाबा हरदेव ने स्वयं प्यार की संजीव मूरत बनकर निस्वार्थ भाव से हमें जीवन जीने की कला सिखाई है। जब परमात्मा से हमें सच्चा प्रेम हो जाता है, तब इस मायावी संसार के लाभ और हानि हम पर प्रभाव नहीं डाल पाते, क्योंकि तब ईश्वर का प्रेम और रजा ही सर्वोपरि बन जाते हैं। इसके विपरीत जब हम स्वयं को परमात्मा से न जोड़कर केवल इन भौतिक वस्तुओं से जोड़ लेते हैं] तब क्षणभंगुर सुख-सुविधाओ के प्रति ही हमारा ध्यान केन्द्रित रहता है। जिस कारण हम इसके मोह में फंसकर वास्तविक आनंद की अनुभूति से प्रायः वंचित रह जाते है।

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सुदीक्षा महाराज ने कहा कि वास्तविकता तो यही है कि सच्चा आनंद केवल इस प्रभु परमात्मा से जुड़कर उसकी निरंतर स्तुति करने में है, जो संतों के जीवन से निरंतर प्रेरणा लेकर प्राप्त किया जा सकता है। यही भक्त के जीवन का मूल सार भी है। परिवार, समाज एवं संसार में स्वयं प्यार बनकर प्रेम रूपी पुलों का निर्माण करें, क्योंकि समर्पण एवं प्रेम यह दो अनमोल शब्द ही संपूर्ण प्रेमा भक्ति का आधार है। जिसमें सर्वत्र के कल्याण की सुंदर भावना निहित है।

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समर्पण दिवस के अवसर पर दिवगंत संत अवनीत की निस्वार्थ सेवा का जिक्र करते हुए सतगुरु माता ने कहा कि उन्होंने सदैव गुरु का सेवक बनकर अपनी सच्ची भक्ति एवं निष्ठा निभाई, न कि किसी रिश्ते से जुड़कर रहे। इस समागम में मिशन के अनेक वक्तागणों ने बाबा के प्रेम, करूणा, दया एवं समर्पण जैसे दिव्य गुणों को अपने शुभ भावों द्वारा विचार, गीत, भजन एवं कविताओं के माध्यम से व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बाबा हरदेव सिंह की करूणामयी अनुपम छवि, प्रत्येक श्रद्धालु के हृदय में अमिट छाप के रूप में अंकित है। उनके इन उपकारों के लिए निरंकारी जगत का प्रत्येक भक्त सदैव ही ऋणी रहेगा।

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