Bangladesh में हिंदुओं के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले संत चिन्मय कृष्ण दास को 25 नवंबर को ढाका एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर देशद्रोह और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का आरोप है। यह घटना चटोग्राम में हिंदू समुदाय की एक रैली के बाद सामने आई। यहां जानें उनसे जुड़ी 7 महत्वपूर्ण बातें:
1. पुंडरीक धाम के प्रमुख
चिन्मय कृष्ण दास बांग्लादेश के इस्कॉन मंदिर के प्रमुख हैं, जिसे पुंडरीक धाम के नाम से जाना जाता है। यह स्थान राधारानी के पिता वृषभानु महाराज के अवतार श्रील पुंडारिक विद्यानिधि के कारण पवित्र माना जाता है।
2. पूर्व नाम
चिन्मय कृष्ण दास का असली नाम चंदन कुमार धर था। सन्यास ग्रहण करने के बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी रखा।
3. बांग्लादेश सनातन जागरण मंच के प्रवक्ता
वे बांग्लादेश सनातन जागरण मंच के प्रवक्ता भी हैं। उनकी अगुवाई में चटोग्राम में हिंदू समुदाय की एक रैली आयोजित की गई, जिसमें अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकारों के लिए आवाज उठाई गई।
4. रैली में उठाई 8 मांगें
चिन्मय कृष्ण दास की अध्यक्षता में हुई रैली में हिंदू समुदाय के लिए अल्पसंख्यक सुरक्षा कानून, मंदिर-मठों की संपत्तियों की सुरक्षा, और अल्पसंख्यक मामलों के लिए मंत्रालय के गठन जैसी 8 मांगें रखी गईं।
5. अल्पसंख्यकों के लिए संघर्ष
बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के सत्ता में आने के बाद हिंदुओं समेत अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के कई मामले सामने आए। इन घटनाओं के विरोध में और अल्पसंख्यकों को एकजुट करने में चिन्मय कृष्ण दास ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
6. राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का आरोप
रैली के बाद उन पर आरोप लगा कि उन्होंने बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज के ऊपर भगवा झंडा फहराया। यह घटना चटोग्राम में हुई। बांग्लादेश में इस तरह के अपराध के लिए आजीवन कारावास का प्रावधान है।
7. आरोपों से इनकार
चिन्मय कृष्ण दास ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि घटना के समय वे रैली स्थल से 2 किलोमीटर दूर थे और उनका इससे कोई संबंध नहीं है।
चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति और उनके अधिकारों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। मामले की निष्पक्ष जांच की मांग हो रही है।





