सावन के महीने में शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। पुत्रदा एकादशी को साल में दो बार मनाया जाता है। एक सावन महीने के शुक्ल पक्ष में और दूसरी पौष मास के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है।धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने से जिसे सन्तान नही होती उसे संतान का सुख मिलता है। संतान की लंबी आयु और खुशाल जीवन के लिए भी ये व्रत रखा जाता है।
शास्त्रो के अनुसार एकादशी का महत्व
बता दें कि शास्त्रों में इस एकादशी का बहुत महत्व है। सालभर में कुल 24 एकादशियां होती है, लेकिन जब अधिकमास आता है, तो इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है।18 जुलाई से लेकर 16 अगस्त तक अधिक मास यानि मलमास पड़ा था, जिसमें शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की एकादशी मनाई गई थी। इन दोनो एकादशियों को मिलाकर जब भी अधिकमास या मलमास आता है तो पूरे वर्ष में कुल 26 एकादशी हो जाती है।
पुत्रदा एकादशी का शुभ मुहूर्त
पुत्रदा एकादशी व्रत 27 अगस्त के दिन मनाई जाएगी।इस व्रत का शुभ मुहूर्त शुक्ल एकादशी से आरंभ- 27 अगस्त 2023 को प्रात 12 बजकर 08 मिनट पर और समापन – 27 अगस्त 2023 को रात 9 बजकर 32 मिनट पर होगा।
पुत्रदा व्रत कथा
पुत्रदा एकादशी का व्रत केवल पुत्र से नहीं है, बल्कि संतान से है। संतान पुत्र भी हो सकता है और पुत्री भी। पौराणीक कथा के अनुसार एकादशी का व्रत जरूर करना चाहिए। इसके आलावा जो व्यक्ति मोक्ष प्राप्त करके स्वर्ग जाना चाहता है, तो उसे यह व्रत जरूर करना चाहिए। जो लोग संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं या जिनकी पहले से संतान है और अपने बच्चो का भविष्य मे कुछ अच्छा देखना चाहते है तो उन लोगों के लिए पुत्रदा एकादशी का व्रत किसी वरदान से कम नहीं है।

