Gurudwara Nanak Darbar Sahib

Guru Arjun Dev के शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में सुखमणी साहिब के पाठ जारी, गुरबाणी कीर्तन से किया संगत को निहाल

धर्म पानीपत

(समालखा से अशोक शर्मा की रिपोर्ट) पानीपत के खंड समालखा के मॉडल टाउन स्थित गुरुद्वारा नानक दरबार साहिब में 5वें Guru Arjun Dev के शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में स्त्री सत्संग द्वारा किए जा रहे श्री सुखमणी साहिब के पाठ 29वें दिन में प्रवेश कर गए। इस दौरान गुरमुख सिंह द्वारा गुरबाणी कीर्तन करके संगत को निहाल किया। इस अवसर पर विश्वकर्मा धर्मशाला के प्रधान जयप्रकाश धीमान ने गुरु ग्रंथ साहिब के चरणों में मात्था टेक कर आर्शीवाद लिया।

इस दौरान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान जगतार सिंह बिल्ला और अन्य सदस्यों ने जयप्रकाश को सिरोपा व दस गुरुओं का स्वरूप देकर सम्मानित किया। प्रधान जगतार सिंह बिल्ला ने बताया कि आज के प्रसाद की सेवा कुलदीप सिंह और अमरजीत सिंह परिवार की तरफ से की गई।। इस अवसर पर जगतार सिंह बिल्ला ने गुरु अर्जुन देव के जीवन पर प्रकाश डाला।

गुरु घर

उन्होंने कहा कि गुरु अर्जुन देव का जन्म 1563 में गोइंदवाल या तरनतारन जिले में हुआ था। उनके नाना गुरु अमरदास थे, जो तीसरे सिख गुरु थे। उनके पिता गुरु रामदास, सिखों के चौथे गुरु थे। वह सिखों के 5वें गुरु और सिख धर्म के पहले शहीद थे, जिन्हें मुगल सम्राट जहांगीर के आदेश पर फांसी दे दी गई थी।

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अर्जुन देव

गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान जगतार सिंह बिल्ला ने कहा कि गुरमति-विचारधारा के प्रचार-प्रसार में गुरु की भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता। गुरु अर्जुन देव ने पंजाबी भाषा साहित्य एवं संस्कृति को जो अनुपम देन दी, उसका शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता। इस अवदान का पहला प्रमाण ग्रंथ साहिब का संपादन है। इस अवसर पर काफी संख्या में संगत मौजूद थी।

गुरु घर 1

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