हरियाणा के झज्जर में साधारण से परिवार में जन्मे और पले-बढ़े बजरंग पुनिया के पास क्रिकेट या बैडमिंटन जैसे खेलों को खेलने के लिए पैसे नहीं थे। उनके पिता बलवान सिंह खुद एक पहलवान थे। बजरंग अक्सर पहलवानों की कुश्ती देखने के लिए स्कूल से भाग जाया करते थे। बजरंग पुनिया कहते हैं, “मुझे पता ही नहीं चला कि कब कुश्ती मेरा हिस्सा बन गया।”
बजरंग पुनिया ने घुटने की चोट से जूझने के बावजूद टोक्यो में अपने पहले ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर अपने सपनों को उड़ान दी। बजरंग पुनिया फ्रीस्टाइल कुश्ती के प्रमुख भारतीय खिलाड़ी हैं।
बजरंग पूनिया ने 2018 के एशियन खेलों में पुरुषों की 65 किलोग्राम वर्ग स्पर्धा के फाइनल में जापान के पहलवान तकातानी डियाची को एकतरफा मुकाबले में 11-8 से शिकस्त दी। वह भारत के 9वें ऐसे पहलवान हैं जिसने एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता है। साथ ही, कॉमन वेल्थ गेम-2022 में पुरुषों के 65 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया।
जन्म | 26 फरवरी, 1994, खुड़ाना, हरियाणा, भारत |
शिक्षा | महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी |
उपलब्धि | पद्म श्री, मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार, अर्जुन पुरस्कार |
माता- पिता | ओमप्यारी पूनिया, बलवान सिंह पूनिया |
पत्नी | संगीता फोगट |