अधिक मास के शुक्ल पक्ष की परमा एकादशी व्रत 12 अगस्त को रखा जाएगा जिसमें व्रत और दान करने से साल के सभी एकादशी व्रत करने जितना पुण्य मिलेगा। परमा एकादशी को पुरुषोत्तम और कमला एकादशी भी कहा जाता है। ये दिन स्नान-दान, व्रत और भगवान विष्णु की पूजा के लिए अहम माना जाता है, कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जाने-अनजाने में किए गए पाप खत्म हो जाते हैं।
परमा एकादशी की पौराणिक कथा
मान्यता के अनुसार, प्राचीन काल में सुमेधा नामक एक ब्राह्मण अपनी पत्नी पवित्रा के साथ काम्पिल्य नगर में रहता था। परमा बहुत ज्यादा धार्मिक थी। एक दिन गरीबी से परेशान होकर सुमेधा ब्राह्मण ने विदेश जाकर धन कमाने का विचार किया लेकिन पवित्रा ने कहा कि पूर्व जन्म के फल से धन और संतान प्राप्त होते है इसलिए आप चिंता न करें।
कुछ दिनों बाद गरीब ब्राह्मण के घर महर्षि कौंडिन्य आए और गरीब ब्राह्मण ने उनकी तन-मन से सेवा की तो महर्षि कौंडिन्य ने उनकी गरीबी दूर करने का उपाय बताया। कौंडिन्य ने उपाय में बताया कि अधिक मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत तथा रात्रि जागरण करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते है और इतना कहकर महर्षि कौंडिन्य वहा से चले गए। सुमेधा ने महर्षि के उपाय को सुनकर अपनी पत्नी के साथ एकादशी का व्रत किया और उन्हें सुखी जीवन प्राप्त हुआ।
उन्मीलनी द्वादशी का बनेगा दुर्लभ शुभ संयोग
इस बार 12 अगस्त को आर्द्रा नक्षत्र, एकादशी और द्वादशी दोनों तिथियां एक ही दिन रहेंगी। इस दिन मृगशिरा नक्षत्र या हर्षण योग का संयोग बन रहा है, साथ ही इन दोनों तिथियों के एक साथ होने से उन्मीलनी महाद्वादशी का दुर्लभ शुभ संयोग बन रहा है। बता दें कि जब एक ही दिन दोनों तिथियां हो जिसमें एकादशी तय समय से ज्यादा वक्त तक रहे और साथ ही इस दिन द्वादशी तिथि भी हो तो इसे उन्मीलनी या महाद्वादशी कहा जाता है।
उन्मीलनी द्वादशी के संयोग में क्या करें
एकादशी और द्वादशी दोनों भगवान विष्णु से उत्पन्न हुई तिथियां मानी जाती हैं इसलिए दोनों के स्वामी स्वंय भगवान श्री हरि हैं। पुराणों में बताया गया है कि इस दिन सूर्योदय से पहले पानी में गंगाजल और तिल डालकर स्नान करने का विधान है। पुण्य स्नान के बाद भगवान श्री हरि का अभिषेक करना चाहिए और दिन में जरुरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े और अन्य जरुरी चीजें दान देनी चाहिए।

