➤ शिकोहपुर लैंड डील: रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ ED का आरोपपत्र दाखिल
➤ ₹37.6 करोड़ की 43 संपत्तियां जब्त, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 11 आरोपी
➤ मामला 2008 के गुरुग्राम जमीन सौदे से जुड़ा, कांग्रेस सरकार पर सवाल
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हरियाणा के शिकोहपुर लैंड डील से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा सहित कुल 11 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। यह चार्जशीट दिल्ली की एक विशेष PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम) कोर्ट में दायर की गई है, जिससे यह हाई-प्रोफाइल मामला एक नए चरण में पहुंच गया है। केंद्रीय एजेंसी ने इस कार्रवाई के तहत रॉबर्ट वाड्रा और उनकी कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड की ₹37.6 करोड़ मूल्य की 43 संपत्तियां भी ज़ब्त की हैं, जो इस जांच की गंभीरता को दर्शाता है।
यह मामला 2008 में गुरुग्राम के शिकोहपुर (जो अब सेक्टर 83 के नाम से जाना जाता है) में हुए एक विवादास्पद जमीन सौदे से संबंधित है। ED के अनुसार, वाड्रा की कंपनी स्काइलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने 2008 में ऑनकारेश्वर प्रॉपर्टीज से 3.53 एकड़ जमीन मात्र 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इस सौदे के कुछ ही महीनों बाद, उस समय के भूपिंदर सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने इस जमीन पर व्यावसायिक कॉलोनी विकसित करने के लिए लाइसेंस जारी कर दिया। इस लाइसेंस के जारी होते ही, जमीन की कीमत में अभूतपूर्व वृद्धि हुई, जो लगभग 700 फीसदी तक बढ़ गई।
सितंबर 2012 में, स्काइलाइट हॉस्पिटैलिटी ने यही जमीन डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दी। इस सौदे की वैधता पर सबसे पहले तत्कालीन IAS अधिकारी अशोक खेमका ने सवाल उठाए थे, जिन्होंने 2012 में इस सौदे के म्यूटेशन को रद्द कर दिया था। खेमका की इस कार्रवाई के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया था और इसने राजनीतिक गलियारों में भी काफी हलचल मचा दी थी।
प्रवर्तन निदेशालय लंबे समय से इस मामले की जांच कर रहा था, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग के विभिन्न पहलुओं को खंगाला जा रहा था। ED का आरोप है कि इस जमीन सौदे में अवैध वित्तीय लेनदेन हुए थे और यह मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। आरोपपत्र दाखिल होने के बाद अब इस मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रॉबर्ट वाड्रा और अन्य आरोपियों के खिलाफ क्या सबूत पेश किए जाते हैं और अदालत का क्या निर्णय आता है। यह मामला हरियाणा में हुए जमीन घोटालों और राजनीतिक संबंधों की पड़ताल में एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

